सरिता विशेष

गांवों में वह मिठाई सब से ज्यादा पसंद की जाती?है, जो लंबे समय तक चले और जिसे रखने के लिए बहुत सावधानी न बरतनी पड़े. इन मिठाइयों में चीनी से तैयार होने वाली मिठाइयों को सब से ज्यादा पसंद किया जाता?है. चीनी की मिठाइयों में खिलौनों के अलावा गट्टे भी बहुत पसंद किए जाते?हैं. दीवाली के समय इन की खरीदारी गांवों के अलावा शहरों में भी होती?है. चीनी के गट्टे बनाने में 75 फीसदी चीनी और 25 फीसदी चीनी पाउडर का इस्तेमाल किया जाता?है. इन को आपस में मिला कर चाशनी बनाई जाती?है. इस तैयार चाशनी को साफ कपड़े पर गोल कर के रखा जाता है. इस के बाद इसे चाकू की सहायता से छोटेछोटे टुकड़ों में काट लिया जाता है. गट्टे कई तरह के बनते?हैं. छोटे आकार वाले गट्टे ज्यादा पसंद किए जाते हैं. गांवों के मेलोंठेलों में मिलने वाले चीनी के खिलौने अब शहरों में भी मिलने लगे हैं. अब तो कई बड़े दुकानदार भी इन को बनाने लगे हैं. इन खिलौनों की सब से ज्यादा मांग दीवाली के समय होती?है. धान के लावा और चूरा के साथ इन को मिला कर खाने का मजा ही दूसरा होता है. ये खिलौने चीनी से महंगे मिलते हैं. आमतौर पर ये 100 रुपए प्रति किलोग्राम से ले कर 160 रुपए प्रति किलोग्राम तक बिकते हैं. इन की कीमत चीनी की बढि़या क्वालिटी पर निर्भर करती है. अच्छी चीनी से साफ खिलौने बनते?हैं. अगर चीनी पीली या गंदी हो तो खिलौने भी उसी तरह से दिखने लगते हैं.

चीनी के खिलौने बनाने वाले रामकुमार गुप्ता कहते हैं, ‘चीनी के खिलौने बनाने के लिए सब से पहले चीनी और पानी को मिला कर घोल तैयार किया जाता है. यह घोल 3 हिस्से चीनी और 1 हिस्सा पानी मिला कर तैयार किया जाता?है. ‘इसे कढ़ाई में डाल कर गरम किया जाता है. जब चाशनी तैयार हो जाती है, तो उसे लकड़ी के सांचे में भर दिया जाता है. ये लकड़ी के सांचे खास किस्म के बने होते हैं. सांचे में खिलौने के आकार की खाली जगह होती है. इस के ऊपर एक बड़ा सा छेद होता है. छेद के जरीए ही चीनी का घोल इस में डाला जाता है. सांचे को?ठंडा करने के लिए पानी में डाल देते हैं. सांचा लकड़ी के 2 पल्लों से मिल कर बना होता है. जब अंदर भरा चीनी का घोल ठंडा हो कर खिलौने की शक्ल ले लेता है, तो सांचे को खोल कर सावधानी से खिलौना बाहर निकाल कर सफेद चादर पर सूखने के लिए रख देते?हैं. अगर रंगबिरंगा खिलौना तैयार करना हो तो चीनी का घोल बनाते समय उस में मनचाहा खाने वाला रंग मिलाया जा सकता है.’

ज्यादातर लोग चीनी के रंगीन खिलौनों की बजाय सफेद खिलौने ही पसंद करते हैं. बच्चे रंगबिरंगे खिलौने ज्यादा पसंद करते हैं. चीनी  से ज्यादा कीमत पर बिकने वाले ये खिलौने केवल चीनी और पानी से तैयार होने के कारण कभी खराब नहीं होते. खोए और छेने की मिठाइयों की तरह इन में मिलावट नहीं होती. अगर कोई मिलावट करने की कोशिश करता?है, तो खिलौना देखने से ही मिलावट का पता चल जाता है. सेहत के लिहाज से भी चीनी के खिलौने नुकसान नहीं पहुंचाते हैं. गांवों में इन की खरीदारी सस्ते होने की वजह से खूब होती है. इन को बहुत दिनों तक रखा भी जा सकता है. दीवाली के समय चूरा और धान का लावा हर घर में खरीदा जाता है. इन के साथ खिलौने या गट्टे खा कर आसानी से भूख मिटाई जा सकती है. चीनी के खिलौने व लावा वगैरह को कहीं ले जाना भी आसान होता है. रास्ते में इन के खराब होने का खतरा भी नहीं रहता है.