सरिता विशेष

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी की घोषणा करते हुए कहा था कि 500और1,000 रुपए के नोट बंद कर दिए गए हैं. तब से ये दोनों नोट महज कागज के टुकड़े भर रह गए हैं. कागज के टुकड़े में तबदील हुए इन नोटों की वैधता पर विधेयक ला कर फरवरी में इसे संसद में पारित कर दिया गया. नोटबंदी के बाद सरकार के 31 दिसंबर, 2016 तक देश में रहने वाले और 31 मार्च, 2017 तक प्रवासी भारतीयों को पुराने नोट बदलने का मौका दिया गया. तात्पर्य यह कि 500 और 1,000 के पुराने नोट अब कूड़ा बन गए हैं.

कुछ लोग शायद यह उम्मीद लगाए थे कि ये नोट बाजार में लौट आएंगे लेकिन वे शायद भूल रहे थे कि सरकार के फैसले अविश्वसनीय नहीं हो सकते. इसलिए आप के घर पर यदि ये पुराने नोट 10-10 की संख्या से ज्यादा हैं तो अब यह अपराध बन गया है और पकड़े जाने पर जेल की सजा तथा 50 हजार रुपए तक का जुर्माना लग सकता है. जो नोट कल तक यानी 8 नवंबर, 2016 से पहले हमारी अर्जित संपत्ति होती थी और उन नोटों को संभाल कर तिजोरी में रखते थे, वही नोट रखना अब अपराध बन गया है.

सामान्य व्यक्ति के पास तो उस की मेहनत का पैसा था और नोटबंदी के बाद वह बैंक में जमा करवा चुका है लेकिन फिर भी बहुतों के पास थोड़ाबहुत पैसा पड़ा रहता ही है. यह कबाड़ घर में रखना अब गले की घंटी बन गया है. पुराने नोट रखने की संख्या 10 तय की गई है. लेकिन यह कम है. हमारे यहां जो मुद्रा प्रचलन में थी, उसे किसी भी संख्या में रखने का मौलिक अधिकार होना चाहिए. यह कानून मूलतया गलत है.