रविवार छुट्टी का दिन होता है. देर तक सोना सबको पसंद होता है. ऐसे में सुबह लंच का समय खत्म हो जाता है. पति पत्नी दोनों यही चाहते हैं कि रविवार की छुट्टी मौज मस्ती में गुजरे. रोज की तरह सुबह उठ कर ब्रेकफास्ट लंच और डिनर बनाने जैसा काम न करना पडे. पैरेंटस के साथ ही साथ बच्चें भी छुट्टी के इस दिन को बहुत इंज्वाय करना चाहते हैं. वह चाहते है कि पैरेंटस केवल उनके साथ ही न रहे बल्कि घर से बाहर घूमने, खाने और मौज करने में शामिल रहे. ऐसे में अब संडे ब्रंच का कल्चर बढ रहा है.

होटल फेयर फील्ड के चीफ शेफ प्रशांत उत्तम राव सूर्यवंशी कहते हैं ‘इसमें सुबह का ब्रेक फास्ट हल्का कर लिया जाता है. इसके बाद दोपहर का लंच हैवी हो जाता है.’

होटल फेयर फील्ड के डायरेक्टर सेल्स विक्रम सिंह कहते हैं ‘जब घर से बाहर लंच करने का विकल्प परिवार के पास होता है तो बच्चे अपनी पंसद का खाना पसंद करते हैं और बाकी लोग अपनी पसंद का. ऐसे में सबकी पंसद के चक्कर में बिल बढ़ जाता है और बहुत सारे व्यंजन का स्वाद रह जाता है. हमने अपने होटल में ‘परफेक्ट संडे ब्रंच’ की नई शुरूआत की है. जिसमें हम चाय से लेकर चाट, स्वीट, पास्ता, चाइनीज, साउथ इंडियन और नार्मल खाने के साथ मुगलई डिश तक गेस्ट के लिये रखते हैं. पूरी तरह से यह बुफे होता है. एक नार्मल चार्ज देकर गेस्ट अपने पंसद के हर खाने का स्वाद ले सकता है. खाने के स्वाद के साथ एक बेहतर माहौल देने का काम किया जाता है. जिससे गेस्ट पूरी तरह से खुश होकर जाये.’

होटल रेनेंसा की अस्सिटेंट मैनेजर मार्केटिंग एंड कम्यूनिकेशन फातिमा अब्बास कहती हैं ‘बुफे सिस्टम में खाने की बरबादी नहीं होती. जिससे कम पैसे में बहुत सारी डिश का स्वाद तो लिया ही जा सकता है. खाना खराब नहीं होता. हर होटल की सामाजिक जिम्मेदारी होती है कि वह खाने की बरबादी को रोकने के उपाय करे, जिससे खाना भी खराब न हो और ग्राहक की जेब भी ज्यादा ढीली न हो.’

असल में होटल में खाने में प्लेट सिस्टम में खाना बहुत बरबाद होता है और मंहगा भी पड़ता है. ग्राहक को चुनी हुई डिश ही खाने को मिलती है. विक्रम सिंह कहते हैं ‘खाने में हर तरह की डिश के साथ हाईजीन और डाइट का पूरा ख्याल रखा जाता है. ग्राहक को यह पूरी आजादी है कि वह आराम से अपने मनपंसद खाने का स्वाद ले सके. किसी भी तरह से वह अपने को असुविधा में अनुभव न करे.’