एक होस्ट के रूप में 9 सालों में जय में क्या बदलाव आए?

लुक वाइज, कौन्फिडैंस वाइज, ऐक्टिंग वाइज बहुत सारे चेंज हुए हैं. पहले डरतेडरते ऐंकरिंग करता था और दिमाग में यही रहता था कि जल्दी काम खत्म करो और निकलो, मगर अब ऐसा नहीं है. अब दिमाग में यह रहता है कि स्टेज पर लोगों को क्या बैस्ट दिखाऊं. पहले लर्निंग लाइसैंस वाला था, इसलिए डरते हुए गाड़ी चलाता था पर अब कौन्फिडैंस का लाइसैंस मिल गया है, इसलिए फर्राटे भरता हूं.

इंडस्ट्री में जो भी ऐक्टिंग से होस्टिंग में आया सिर्फ होस्ट बन कर रह गया. ऐसा क्यों?

मैं इस का कारण आलसीपन मानता हूं. रिऐलिटी शो हफ्ते में 2 दिन ही शूट होते हैं. बाकी दिन आराम करो. पैसा भी अच्छा मिलता है तो लगता है कि डेली सोप की टैंशन में कौन पड़े. जब पैसा भी भरपूर मिल रहा हो और काम भी 2 दिन का है, तो आलस आने लगता है और फिर टैंशन फिल्मों और डेली शोज में काम करने का. रुझान कम होता जाता है. जब आप कम इंट्रैस्ट लेते हैं तो एक दिन ऐसा आता है कि आप को फिल्मों में काम मिलना बंद हो जाता है.

आप ऐक्टिंग को कितना मिस करते हैं?

बहुत ज्यादा, लेकिन जब एक के बाद एक ऐंकरिंग के औफर मिलते चले गए और मैं करता चला गया तो लोगों को यही लगा कि मैं अब सिर्फ ऐंकरिंग करना चाहता हूं. लेकिन मैं सब से कहना चाहता हूं कि मैं अब ऐक्टिंग में लौटना चाहता हूं, रोमांटिक फिल्में करना चाहता हूं. सिर्फ ऐंकरिंग में बंध कर रहना मेरा उद्देश्य कभी नहीं रहा.

ऐंकरिंग के लिए मसाला कहां से लाते हैं?

इस में होमवर्क जैसा कुछ नहीं होता. सब स्टेज पर लाइव करना पड़ता है. तुरंत देखो और रिएक्शन दो. यही एक अच्छे ऐंकर की निशानी है. एक बात जरूर है मैं शूटिंग से 1 दिन पहले घर पर ही रहता हूं. कोई नाइट पार्टी नहीं करता हूं. भरपूर नींद लेता हूं ताकि सुबह फ्रैश हो कर शूटिंग कर सकूं.

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