फरहान अख्तर ने आठ वर्ष बाद अपनी पहली फिल्म ‘‘रॉक ऑन’’ का सिक्वअल ‘रॉक ऑन 2’ का निर्माण अपनी फिल्म निर्माण कंपनी ‘‘एक्सेल इंटरटेनमेंट’’ के बैनर तले किया, जिसमें उनके मित्र रितेश सिद्धवानी भागीदार हैं. पहली फिल्म ‘‘रॉक ऑन’’ ने भी बाक्स आफिस पर कुछ खास कमायी नहीं की थी, मगर इस फिल्म ने फरहान अख्तर को बतौर गायक व संगीतकार म्यूजिकल कंसर्ट करने की एक नई राह जरूर मिल गयी थी. लगभग सत्तर म्यूजिकल कंसर्ट करने के बाद फरहान अख्तर को अपने आपको लेकर ऐसी गलत फहमी हुई कि उन्होंने 75 करोड़ की लागत से ‘रॉक ऑन’ का सिक्वअल ‘‘रॉक ऑन 2’’ का निर्माण कर डाला. पर इस फिल्म की बाक्स आफिस पर बड़ी दुर्गति हुई.

पहले दिन बड़ी मुश्किल से ‘‘रॉक ऑन 2’’ ने 2 करोड़ ही बाक्स आफिस पर कमाए और पूरे वीकेंड में साढ़े सात करोड़ का आंकड़ा नही दे पायी. यानी कि लागत का दस प्रतिशत भी नहीं कमा पायी. अब फरहान अख्तर अपनी गलती को कबूल करने की बजाय चिल्ला रहे हैं कि मोदी के नोट बंदी आदेश के चलते उनकी फिल्म को बाक्स आफिस पर दर्शक नहीं मिले. तो वहीं फिल्म ‘‘रॉक ऑन 2’’ के ही कलाकार अर्जुन रामपाल का कहना है कि देश की भलाई के लिए उठाए गए नोट बंदी के कदम के लिए कुर्बानी देना ही चाहिए.

मगर जानकर लोगों की राय में यदि नोट बंदी न हुई होती, तो भी फरहान अख्तर की फिल्म ‘‘रॉक ऑन 2’’ को दर्शक न मिलते. अब तक फरहान अख्तर की कंपनी ‘‘एक्सेल इंटरटेनमेंट’’ आठ असफल फिल्मों का निर्माण कर वितरकों व स्टूडियो को करोड़ो रूपए की चपत लगा चुकी है. इसी के चलते अब कोई स्टूडियो उनके साथ काम करना नहीं चाहता. इसी वजह से पिछले दिनो एक्सेल इंटरटेनमेंट ने कुछ फिल्मों के निर्माण से तौबा कर ली है.

पर जहां तक फिल्म ‘‘रॉक ऑन 2’’ की दुर्गति का सवाल है, तो सभी जानकर इसके लिए पूरी तरह से फरहान अख्तर को अकेले ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. फरहान अख्तर के अति नजदीकी सूत्रों के अनुसार ‘‘रॉक ऑन 2’’ देखने के बाद फरहान अख्तर के पिता व मशहूर पटकथा लेखक जावेद अख्तर ने फरहान से कह दिया था कि उनकी फिल्म ‘रॉक ऑन 2’ को दर्शक नहीं मिलेंगे.

सूत्र बताते हैं कि जावेद अख्तर ने अपने बेटे फरहान को सलाह दी थी कि वह कम से कम आधी फिल्म को नए सिरे से पुनः फिल्माएं. मगर हठी फरहान ने ऐसा करने से साफ इंकार कर दिया था. सूत्रों का दावा है कि जबकि फरहान ने ‘रॉक ऑन 2’ की अदाकारा प्राची देसाई को खुश करने के लिए दो तीन सीन मुंबई में पुनः फिल्माए थे.

इतना ही नहीं फरहान अख्तर के उपर म्यूकिल कंसर्ट का भूत इस कदर हावी रहा कि वह  अपनी फिल्म को बहुत गलत ढंग से प्रचारित करते रहे. फिल्म ‘‘रॉक ऑन 2’’ देखने पर पता चलता है कि इसमें किसानों की समस्या, गांव के बच्चों की शिक्षा का मसला, पूरे गांव में आग लगने के बाद गांव वालों को राजनेता के बेटे के अहम के चलते किस तरह भूखे मरना पड़ता है, जैसे कुछ मुद्दे बहुत अच्छे ढंग से उठाए गए हैं, मगर फरहान अख्तर अपनी फिल्म ‘रॉक ऑन 2’ को महज एक म्यूजिकल फिल्म बताते रहे.

जब संगीत का शौकीन दर्शक सिनेमा घर के अंदर पहुंचा, तो उसे संगीत के नाम पर घटिया संगीत ही मिला. इसलिए उसने फिल्म की बुरायी की, जिसके चलते फिल्म देखने का इच्छुक दर्शक भी बिदक गया. जो दर्शक सामाजिक समस्याओं को परदे पर देखना चाहता है, वह सिनेमा घर के अंदर गया ही नहीं.

यहां तक कि जब फिल्म ‘‘रॉक ऑन 2’’ के प्रदर्शन से पहले फरहान अख्तर से हमने सवाल किया था कि आठ वर्षों में संगीत के साथ सामाजिक व राजनीतिक स्थितियां काफी बदली हैं. क्या उसका इस फिल्म में कोई जिक्र है? तो फरहान अख्तर ने सफेद झूठ बोलते हुए कहा था-‘‘हमारी फिल्म संगीत व रिश्तों की बात करती है. हमारीफिल्म सामाजिक या राजनीतिक नहीं है. संगीत में जो बदलाव आया है, वह हमारी फिल्म में है. पहली फिल्म में जो आदित्य श्राफ व दूसरे किरदार थे, उनकी जिंदगी में भी अब आठ वर्ष गुजर चुके हैं. उनमें मैच्योरिटी व दुनिया की समझ आ गयी है. उनके गीत लेखन में ज्यादा गहराई आ गयी है. यह सब हमारी फिल्म में नजर आ रहा है. इसी के साथ हमारी फिल्म ‘रॉक ऑन 2’ रिश्तों और दोस्ती के बारे में है. अपने आपको संगीत के जरिए खोज निकालने की बात करती है.’’

यानी कि फरहान अख्तर लगातार अपनी फिल्म को गलत ढंग से प्रचारित करते रहे. अब वह ऐसा किस मार्केटिंग एजेंसी या अपने  पीआर की सलाह पर कर रहे थे या खुद को तथा श्रद्धा कपूर को बहुत बड़ा म्यूजीशियन साबित करने के लिए इस तरह फिल्म को प्रचारित कर रहे थे, यह तो वही जानें. फरहान अपनी टीम के साथ ‘‘रॉक ऑन 2’’ को प्रमोट करने के लिए म्यूजिकल कंसर्ट करते रहे या टीवी चैनलों पर धमाचौकड़ी करते रहे. उनके पास प्रिंट के पत्रकारों से मिलने का वक्त नहीं था.

उनकी पीआर टीम हर बार यही कहती रही कि फरहान की तरफ से प्रिंट इंटरव्यू के लिए समय नहीं मिल रहा हैं. वह टीवी तथा म्यूजिकल कंसर्ट में व्यस्त हैं. वह सोशल मीडिया पर भी अति व्यस्त रहे. जबकि यह साबित हो चुका है कि सोशल मीडिया पर मिलने वाली करोड़ो की लाइक्स से बाक्स आफिस के आंकड़ों पर असर नहीं पडता है. टीवी पर धमा चौकड़ी मचाने से भी फिल्म के प्रति दर्शक में उत्सुकता नहीं पैदा होती है….पर जब लो आत्ममंथन करना ही नही चाहते, तो इन्हे यह सब कैसे समझ में आएगा..