बढ़ते शहरीकरण और सिमटती जीवनशैली का एक चिंतनीय प्रभाव पुरानी तो पुरानी, नई पीढ़ी पर भी यह पड़ रहा है कि बच्चे एकाध एकड़ के खेत को ही जंगल और खरगोश व कुत्ते जैसे जानवरों को ही वन्यजीव समझने लगे हैं. निसंदेह यह स्थिति उन्हें न केवल प्रकृति से दूर कर रही है बल्कि उन्हें वन्यजीवन के लुत्फ व रोमांच से भी वंचित कर रही है. पर, अच्छी और सुकून देने वाली बात यह है कि लोगों का रुझान अब तेजी से पर्यटन में बढ़ रहा है और इस में भी उन की प्राथमिकता वाइल्डलाइफ है. वन्यजीवन को नजदीक से देखने, महसूस करने और समझने के लिए छत्तीसगढ़ बेहतर राज्य है जहां कुदरत ने जंगल इफरात से संजोए हैं और तरहतरह के दुर्लभ पशुपक्षी भी अपना आशियाना यहां बनाए हुए हैं. इसीलिए सैरसपाटे के शौकीन सैलानी अब बड़ी तादाद में छत्तीसगढ़ का रुख करने लगे हैं. वे यहां के वन्यजीवन को नजदीक से देख शहरी आपाधापी को भूलते, कुदरत के बख्शे नजारों को देख सुधबुध खो बैठते हैं.

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