फेसबुक पर जो विज्ञापन दिखते हैं, उनसे ऐसा लगता है मानों फेसबुक ने आपके मन की बात जान ली है. आपके परिवार में किसी का जन्मदिन है और आपको केक और फूलों के विज्ञापन दिखाई देने लगते हैं.
ऐसा सभी के साथ हुआ है और आगे भी होगा. कई लोगों के लिए ये हैरानी की बात हो सकती है लेकिन ऑनलाइन दुनिया में अब ऐसी बातें देख कर हैरानी नहीं होनी चाहिए.
फेसबुक पर लोग जिस तरह अपनी जानकारी शेयर करते हैं उससे ये सब पता करना बहुत आसान हो जाता है.
आम लोगों के बारे में फेसबुक जितनी जानकारी इकठ्ठा करता है कोई सोशल नेटवर्क नहीं करता. वो 98 तरह की जानकारी इकठ्ठा करके उसी के हिसाब से ऑनलाइन विज्ञापन दिखाता है.
फ़ेसबुक आपकी लोकेशन, आपकी आय, आपकी पसंद-नापसंद, आपकी मौजूदा ज़रूरत, आपके पिछले सर्च, आपके निकटतम मित्रों से हुई आपकी बातचीत के कीवर्ड्स सब जानता है.
इन सबसे मिलकर आपकी प्रोफाइल बनती है और उसके बाद विज्ञापन देने वाली कंपनी तय करती है कि उसे किस तरह की प्रोफ़ाइल वाले लोगों तक पहुँचना है.
फेसबुक का मानना है कि जो विज्ञापन वो लोगों को दिखाता है वो मज़ेदार होने चाहिए, उनके काम के होने चाहिए.
जब भी आप फेसबुक पर लॉग इन होते हैं, ज्यादातर लोग तो कभी लाग आउट करते ही नहीं, तो फेसबुक को यह पता चलता रहता है कि इस वक़्त आपकी ऑनलाइन गतिविधियाँ क्या हैं, आप किस साइट पर हैं वगैरह.
यहाँ तक कि लॉग ऑफ करने के बाद भी फेसबुक के पास आपके बारे में काफ़ी जानकारी पहुंचती रहती है. हर बार जब आप कोई पेज लाइक या शेयर करते हैं तो उसके बारे में फेसबुक के पास पूरी जानकारी तो होती ही है.
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