7 वर्ष पहले की वह रात, जब मैं उस से पहली बार मिली थी, मुझे आज भी याद है. शनिवार का दिन था, रात के 8 बज चुके थे. सोने से पहले मैं कपड़े बदलने जा रही थी, तभी रात के सन्नाटे को चीरती हुई, बाहर की घंटी बजी. पतिदेव बिस्तर में लेट चुके थे. मेरी ओर प्रश्नसूचक दृष्टि से देख कर बोले, ‘‘इस समय कौन हो सकता है?‘‘

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