Organ Donation India: भारत में अंगदान को महादान कहा जाता है. यह सच भी है कि किसी की जान बचाने से बड़ा मानवता का काम दूसरा कोई नहीं लेकिन आर्गेन डोनेशन के आंकड़ों को ध्यान से देखा जाये तो ऐसा सच सामने आता है जो समाज की मर्दवादी सोच की परतें खोल देता है साथ ही कई सवाल भी खड़े करता है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर भारत में आर्गेन देने वाली ज्यादातर औरतें ही क्यों हैं जबकि आर्गेन पाने वालों में ज्यादातर मर्द हैं? क्या औरतें सचमुच अपनी पूरी इच्छा से आर्गेन देती हैं या फिर परिवार, समाज और धार्मिक संस्कारों का दबाव उन्हें ऐसा करने के लिए मजबूर करता है?

एनओटीटीओ यानी नेशनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन हिंदी में इसे राष्ट्रीय अंग एवं ऊतक प्रत्यारोपण संगठन कहा जाता है. यह भारत सरकार के मिनिस्ट्री ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर के अंतर्गत काम करने वाली राष्ट्रीय संस्था है जो देश में ऑर्गन डोनेशन और ऑर्गन ट्रांसप्लांटेशन से जुड़े मामलों को देखती है, डेटा कलेक्ट करती है और नीतियों के क्रियान्वयन का काम करती है.

एनओटीटीओ के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि 2019 से 2023 के बीच भारत में 56,509 आर्गेन डोनेशन हुए इनमें 36,038 यानी लगभग 64 प्रतिशत महिलाएं थीं जबकि आर्गेन डोनेट करने वालों में पुरुष केवल 36 प्रतिशत थे. जब अंग पाने वालों की बात आती है तो तस्वीर पूरी तरह बदल जाती है. लगभग 70 प्रतिशत आर्गेन पुरुषों को मिले और केवल 30 प्रतिशत ही औरतों को हासिल हुए. यानी देने वाली ज्यादातर औरतें और पाने वाले अधिकतर मर्द. 2023 में भी यही स्थिति रही. 15,436 डोनरों में 9,784 औरतें और केवल 5,651 पुरुष थे.

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