Hindi Stories: ईद की मीठी सिवईंयों की मिठास अभी मुंह में ही थी कि महल्ले में एक नया तनाव पैदा हो गया. जबकि, इसी महल्ले में ईद और होली सभी के रंग एक थे चाहे वह होली की गुझियों की बात हो या फिर अमीरन चाची के हाथ के बने कीमा कबाब की. हर त्योहार के रंगों में एक ही संदेश था- एकता, भाईचारा, प्यार. यों भी कुछ सालों से ईद और दीवाली एक ही साथ आ रही थीं, क्यों लड़ते हो आपस में, मैं एक ही हूं, सभी में मेरा वास है.

कसबा सा यह शहर आगरा से कुछ ही दूर था और अनाज की मंडी के नाम से जाना जाता था. मुगलों के जमाने से बसा शहर महल्लों में बंटा था. कई मुसलिम महल्लों में बंटवारे के बाद हिंदुओं के घर भी बन गए थे. ये लोग पाकिस्तान में छूट गए मिलेजुले महल्लों की यादें ले कर आए थे और शुरू में हिंदूमुसलिम का भेदभाव ज्यादा न था. मुसलिम व हिंदू परिवार तकरीबन मिलजुल गए थे.

अभी 2 दिनों पहले की ही बात है जब पंडित रामप्रकाश पड़ोस में ही रहने वाले अमीर मोहम्मद के यहां से ईद की दावत उड़ा कर आए थे. अमीर मोहम्मद की बुजुर्ग खाला अमीरन थीं, उन के कबाब बड़े प्रसिद्ध थे. लड़‌कियां, कालोनी की भाभियां उन से जबतब टैस्टी कबाब बनाने की विधि पूछने चली आतीं. पूरी कालोनी में अच्छेबुरे समय में एकदूसरे के साथ कंधे से कंधा मिला कर हर व्यक्ति तैयार रहता था.

आज जब अमीर मोहम्मद औफिस के लिए अपना स्कूटर स्टार्ट कर रहे थे, उन के पड़ोसी पंडित रामप्रकाश की झलक आंगन में दिखाई दी. वे तुलसी के पौधे पर जल डाल रहे थे. अमीर मोहम्मद ने जैसे ही उन्हें देखा, नमस्ते किया. पंडित जी ने जवाब नहीं दिया.

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