प्रतिष्ठित हिंदी पत्रिकाओं के प्रकाशक, दिल्ली प्रैस द्वारा 2 दिवसीय कहानी लेखन कार्यशाला का आयोजन किया गया. यह आयोजन 28 और 29 जून को नई दिल्ली स्थित दिल्ली प्रैस मुख्यालय में संपन्न हुआ. कार्यशाला में कहानी लेखन में रुचि रखने वाले 50 से ज्यादा लोग शामिल हुए. दिल्ली प्रैस ग्रुप की पत्रिकाओं के संपादक परेश नाथ ने अपने उद्बोधन में कहानी कार्यशाला की आवश्यकता व अच्छी कहानी की विशेषताओं पर चर्चा की. उन्होंने कहा कि कहानी आज के समय को ध्यान में रख कर लिखी जानी चाहिए. कथानक हमारे आसपास बिखरे पड़े हैं, जरूरत है पैनी दृष्टि की. कहानीकार राकेश भ्रमर ने कहानी के प्रस्तुतीकरण व उस की पृष्ठभूमि के अलावा कथानक पर ध्यान देने पर जोर दिया. कहानीकार अरुणेंद्र नाथ वर्मा ने कहा कि एक कहानीकार में स्वभाव का खुलापन तो हो ही, उस का बहिर्मुखी होना भी जरूरी है.

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