Social Story in Hindi : अमीरों के प्रति अनुमति की कोई अच्छी धारणा नहीं थी. रमित के पिता रघुबीर से मिल कर उसे लगा वह अमीरों के बारे में सही सोचती थी लेकिन कभीकभी जो दिखता है वह हकीकत नहीं होती.
रमित ने साइकिल की गति को नियंत्रित करने का प्रयत्न किया लेकिन ढलान की वजह से गति धीमी न हो पाई. अचानक ही सामने से गलत दिशा में आती स्कूटी भी शायद उसे नहीं देख पाई और अगले ही पल दोनों जमीन पर धराशायी पड़े थे. आसपास की दुकानों से लोग आए और दोनों को उठने में और संयत होने में मदद की.
‘‘देख कर नहीं चला सकते, साइकिल पर कंट्रोल तक नहीं है, ध्यान कहीं और ही रहता है. शुक्र है कि मैं स्कूटी पर थी, अगर मैं ट्रक चला रही होती तो?’’ स्कूटी चालक लड़की ने ऊंची आवाज में डांटते हुए कहा.
‘‘लेकिन मैंडम, गलत साइड से तो आप आ रही थीं, मैं तो अपनी दिशा में हूं.’’
‘‘ठीक है, ठीक है, मैं स्कूल के लिए लेट हो रही थी, बच्चे इंतजार कर रहे होते हैं,’’ लड़की ने झेंप मिटाते हुए कहा और फिर सहानुभूति प्रदर्शित करते हुए बोली, ‘‘तुम्हारी तो कमीज भी फट गई है, साइकिल का भी नुकसान हुआ है.’’
‘‘हां जी, कोई बात नहीं, मैं दूसरी ले लूंगा.’’
‘‘कहां से ले लोगे, बड़ी मुश्किल से गुजरबसर होती होगी, छोटीमोटी तनख्वाह में. मैं अकसर देखती हूं यहां से साइकिलों में गुजरते लोगों को, कोई ड्राइवर है तो कोई ओवरसियर तो कोई बाबू, बेचारों के चेहरे पूरी कहानी बयां कर देते हैं.’’
‘‘हां जी,’’ रमित अचकचा कर बोला.
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