Family Story in Hindi : प्यार ही तो है जो दूसरों को अपना बना लेता है. इला यह बात अच्छी तरह समझती थी लेकिन अमला को वह अपना नहीं बना पा रही थी.  कैसी दीवार थी उन दोनों के बीच?

‘‘फिर पड़ोसियों के लिए तुम ने 3 प्लेट्स लगा लीं? हर त्योहार पर अपना दिल दुखी करवाने से थकतीं नहीं? अभी उतरा मुंह ले कर आओगी,’’ कहतेकहते आमिर ने किचन में काम करती अपनी पत्नी इला की लंबी, गोरी, सुराहीदार गरदन को चूम लिया. इला ने बनावटी गुस्सा दिखाया, ‘परेशान मत करो.’ फिर पता नहीं उसे क्या सूझ, आमिर की तरफ घूम गई और उस के चारों तरफ अपनी सुंदर बांहें फैला दीं, ‘‘आमिर, कितना अच्छा लगता है न, हर त्योहार कैसा सुंदर लगता है. मैं तो कहती हूं कि हर इंसान को इंटरकास्ट शादी करनी चाहिए. दोनों तरफ के त्योहार मनाने में कितना मजा आता है.’’

‘‘पर हम तो सब फैस्टिवल्स मनाते हैं, मम्मी.’’ बच्चों के आने की आहट पर इला अब तक अपना काम करने लगी थी, बोली, ‘‘हां, हर त्योहार सैलिब्रेट करना चाहिए,’’ अब आमिर के साथसाथ स्वरा और हर्षिल ने भी एक कोने में रखी थाली से पिन्नी उठा कर खानी शुरू कर दी थी. स्वरा की नजर 3 प्लेट्स पर पड़ी, ‘‘उन आंटी को भी दोगी जो हर बार आप के साथ इतना मिसबिहेव करती हैं.’’

‘‘हां, अच्छा तो नहीं लगता पर फ्लोर के 2 फ्लैट्स में त्योहार पर कुछ दूं और एक को न दूं तो मुझे अच्छा नहीं लगता.’’ हर्षिल ने कहा, ‘‘पर वह आंटी हमें बिलकुल अच्छी नहीं लगतीं, मम्मी. मत दो उन्हें कुछ.’’

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