दिल की भावनाओं को रिश्ते में परिभाषित करना जरूरी है क्या? क्यों उन्हें कोई नाम दिया जाए. दो दिल एकदूसरे को समझ रहे हैं, क्या यह काफी नहीं है?

‘फूल तुम्हें भेजा है खत में, फूल नहीं मेरा दिल है...’ गौरवी ने सुबह से ही ‘कारवां’ चला रखा था. 5,000 गाने हैं उस में. लौकडाउन के कारण आजकल इन्हीं गानों के सहारे तो उस का दिन कटता है, नहीं तो समझ नहीं आता कि करे तो क्या करे.

Tags:
COMMENT