वह दिन अशोक के लिए आफत बन के सामने आया जब देश के महामहिम ने अपने तुगलकी फैंसले से पुरे देश में तालाबंदी की घोषणा कर दी. भला यह भी कोई बात हुई कि लाखों मजदूरों को महामहिम ने एक ही पल में अनाथ कर दिया. वैसे तो गरीबों का कोई माईबाप नहीं होता लेकिन ऐसे वक्त में उम्मीद तो महामहिम से ही लगाई जा सकती थी. खैर यह बातें अब बैमानी लगती है.

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