Romantic Story: यह उस समय की बात है जब मैं 11वीं में पढ़ता था और लाजो 10वीं में. हम दोनों ही एक ही गांव के थे. स्कूल साथ आयाजाया करते थे. पढ़ने में हम दोनों ही तेज थे. वह जाट परिवार से थी. मैं चांग परिवार से था. मेरी छोटी जात थी. मेरा और उस का मेल नहीं था. मैं खूबसूरत था. खेतों में काम करते मेरा बदन गठीला हो गया था. लाजो की जवानी और तरह की थी. वह कोमल और संजीली थी. पतली कमर, गोरा रंग और घुंघराले काले बाल थे. नाक थोड़ी फीनी थी पर उस के चेहरे पर सहजता थी. कोई उसे असुंदर नहीं कह सकता था. जवानी हम दोनों पर ठाठें मार रही थी.
मैं जानता था, वह मेरी तरफ आकर्षित है. मैं उस से दूर रहने की कोशिश करता. मैं अपनी औकात जानता था. सावन का महीना था. आसमान काले बादलों से घिरा हुआ था. बारिश होने का डर था. बंतो की हवेली तक पहुंचतेपहुंचते बारिश तेज हो गई थी. किताबें और खुद को बचाने के लिए मैं हवेली के बरामदे में खड़ा हो गया था. थोड़ी देर बाद लाजो भी मेरे पास आ कर खड़ी हो गई. मैं थोड़ा हट कर खड़ा हो गया.
वह अत्यंत खूबसूरत लग रही थी. उस के कालेकाले बाल तेज चल रही हवा से सावन की घटाओं की तरह लहरा कर उस के चेहरे को ढक जाते थे. वह उसे बारबार हटा रही थी. उस के हटाने के साथ ही उस के चेहरे पर बुलबुले सी बूंदें फना हो रही थीं. उन बूंदों का फना होना भीतर के कोने को कचोट रहा था. मन के भीतर से मैं चाहता था कि वे खूबसूरत बूंदें वैसी ही बनी रहें पर वह बारबार चुन्नी से पोंछ रही थी.
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