Love Story : दिल तो सभी के एकसमान धड़कते हैं, चाहे वे अलगअलग धर्म के हों. सबा और सुकुमार ने एकदूसरे से सच्ची मोहब्बत की थी. धर्म और समाज के ठेकेदार उन का कुछ न बिगाड़ सके. प्रेम सब पर भारी पड़ गया था.

लखनऊ शहर के ऐतिहासिक ग्राउंड बेगम हजरत महल पार्क में चारों तरफ हरी घास फैली हुई थी. पर, एक कोने की घास काफी हद तक बच्चों ने क्रिकेट खेल कर खराब कर दी थी, लेकिन इन बच्चों को, जिन में से अधिकांश किशोर उम्र के थे, इस बात से कोई अंतर नहीं पड़ने वाला था उन्हें तो खेलने के लिए एक अदद मैदान चाहिए था, जो इस बेगम हजरत महल पार्क के रूप में उन्हें मिल गया था.

न जाने कितनी राजनीतिक और ऐतिहासिक रैलियों का गवाह बना है ये पार्क. इस पार्क के ठीक सामने 2 मकबरे बने हुए हैं. इन मकबरों के गुंबद आसमान को छूते हैं. एक तो नवाब सआदत अली खान का मकबरा है और दूसरा मकबरा उन की बेगम का है.

प्रेमी जोड़ों की प्रेमभरी बातों और शिकवेशिकायतों का गवाह बनी हैं ये मकबरे की इमारत और आज इसी मकबरे की इमारत की छाया में सबा और सुकुमार कभी आने वाले जीवन के बारे में संजीदा हो रहे हैं, तो कभी मामले की गंभीरता को हलका करने के लिए हलकीफुलकी नोकझोंक भरी बातें भी कर लेते हैं.

‘‘ये मकबरे असली प्रेम की निशानी होते हैं, चाहे कितने ही साल बीत जाएं, पर मरने के बाद भी दो जिस्म एकदूसरे के पास रहते हैं,‘‘ सबा ने मकबरे की तरफ देखते हुए कहा.

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