मैं मोहब्बत भरा गीत हूं

मुझ को गाओ, महक जाओगे

पंख पंछी गगन नाप कर

चोंच भरभर चहक जाओगे

खुशियों की सांकलें बज उठीं

झोलियां खोल दौड़ो

सभी दुख सकुचाए से हैं खड़े

दिल में जगह दो अभी

पैर के नीचे हो जो धरा

आसमां तक महक जाओगे

दूर रहना बहुत मुझ से तुम

पास आना बहुत सोच कर

मैं तरल हूं बहुत ही सरल

उग्र ज्वाला भरी देह

झेल पाए न मुझ को अगर

बिन मौसम दहक जाओगे.

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