दिन भर स्कूल की झांयझांय से थक कर माधवी उसी भवन की ऊपरी मंजिल पर बने अपने कमरे में पहुंची. काम वाली को चाय बनाने को कह कर सोफे पर पसर गई. चाय पी कर वह थकान मिटाना चाहती थी. चूंकि इस समय उस का मन किसी से बात करने का बिलकुल नहीं था इसीलिए ऊपर आते समय मेन गेट में वह ताला लगा आई थी.

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