Hindi Social Story : दिन भर स्कूल की झांय झांय से थक कर माधवी उसी भवन की ऊपरी मंजिल पर बने अपने कमरे में पहुंची. काम वाली को चाय बनाने को कह कर सोफे पर पसर गई. चाय पी कर वह थकान मिटाना चाहती थी. चूंकि इस समय उस का मन किसी से बात करने का बिल्कुल नहीं था इसीलिए ऊपर आते समय मेन गेट में वह ताला लगा आई थी.
अभी मुश्किल से 2-3 मिनट ही हुए होंगे कि टेलीफोन की घंटी बज उठी. घंटी को सुन कर उसे यह तो लग गया कि ट्रंक काल है फिर भी रिसीवर उठाने का मन न हुआ. उस ने सोचा कि काम वाली से कह कर फोन पर मना करवा दे कि घर पर कोई नही, तभी घंटी बंद हो गई. एक बार रुक कर फिर बजी. वह खीज कर उठी और टेलीफोन का चोंगा उठा कर कान से लगाया. फोन जबलपुर से उस की ननद का था. माधवी ने जैसे ही ‘हैलो’ कहा उस की ननद बोली, ‘‘भाभी, तुम जल्दी आ जाओ. मां बहुत याद कर रही हैं.’’
‘‘मांजी को क्या हुआ?’’ माधवी ने हड़बड़ा कर पूछा.
‘‘लगता है अंतिम समय है,’’ ननद जल्दी में बोली, ‘‘तुम्हें देखना चाहती हैं.’’
‘‘अच्छा,’’ कह कर माधवी ने फोन रख दिया.
घड़ी में देखा, 4 बज रहे थे. जबलपुर के लिए ट्रेन रात को 10 बजे थी. माधवी ने टे्रवल एजेंट को फोन कर 2 बर्थ बुक करने को कहा.
माधवी की आंखों में रह रह कर सास का चेहरा घूमने लगा. उस ने अपनी सास के दोनों रूप देखे हैं. पहले हंस कर दिल से प्यार करने वाली मां का और फिर बिस्तर पर पड़ी एक असहाय बूढ़ी औरत का.
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