बेकुसूर होते हुए भी शीतल बेवजह खुशियों से दूर जिंदगी जीने को मजबूर थी. सारांश की नजरों ने उस के दिल के जख्मों को देख लिया था. लेकिन, कुछ कर पाया वह शीतल के लिए?
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