Hindi Story: ‘कहा था न कि मैं अगर कभी खो गया तो तुम्हें यही मिलूंगा?’ उस के कानों में वह चिरपरिचित आवाज फिर प्रतिध्वनित हो उठी.
‘हां, और मैं ने तुम्हें ढूंढ़ लिया, ढूंढ़तेढूंढ़ते यहां तक आ ही गई,’ उस ने पूरे जोश में कहा. उस की हर्षसिक्त आवाज समंदर से टकरा रही थी.
‘सुना था, नदी समुद्र से मिलती है और मैं नदियों में से गुजरते हुए तुम्हारा पता तलाश करते आखिर तुम से आ ही मिली.’
उंगलियों से विक्ट्री का निशान बना कर वह हवाओं में अपनी विजय की मुहर छाप रही थी. अपने हाथों में सर्फिंग बोर्ड को थामे उस ने बीच पर कदम बढ़ा दिए, हवाओं में मौजूद एक साया सा आ कर उस के आरपार गुजर गया. ऊपर नीला आकाश और नीचे नीलहरित जल पर नाचती दूधिया उर्मियां अजीब सा मायाजाल फैलाए थीं चमकीली रेत पर. उन से बनतेउठतेगिरते क्षणभंगुर मोती यों लग रहे थे जैसे उस की इस उपलब्धि पर सलिल अपने दोनों हाथों से मोती लुटा रहा हो और वह उन के नेह में डूबती जा रही थी.
समुद्र की दैत्याकार लहरों को चुनौती देती सर्फिंग बोर्ड पर अठखेलियां करती पद्मा के चेहरे पर प्रतिशोध के साथ विजय के चिह्न स्पष्ट नजर आ रहे थे. आज हर भय, हर अपराधबोध उस से कोसों दूर थे. उसे गहरा समुद्र भी जमीन प्रतीत हो रहा था. जरा सी चूक उस का यह पल मौत में बदल सकती थी लेकिन आज हर डर उस की जीत ही होगा, उसे अपने अंदर और बाहर के समंदर में, बस, उसी का स्पर्श मिल रहा था.
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