Hindi Story: अब तक आप ने पढ़ा कि जिलाधिकारी निशा के पास एक केस आता है एक विधुर और उस की विधवा मां का जिन्हें विधुर के बेटे दीपक ने कोरे कागज पर साइन करा कर घर से निकाल दिया था. निशा दोनों बुजुर्गों को न्याय दिलाना चाहती थी लेकिन जांच के दौरान पता चलता है कि 30 साल पहले इन बुजुर्गों ने घिनौना गुनाह किया था.

उधर दीपक ने पटवारी द्वारा जमीन के करोड़ रुपए मिलने की बात अपनी पत्नी निर्मला से की तो यह बात सुन कर वह अपने होशोहवास खो बैठती है. अब आगे...

निशा दुविधा में पड़ गई थी. एक ओर उसे गुनहगारों के साथ न्याय भी करना था और दूसरी ओर उन्हें उन के बरसों पुराने कसूर की सजा भी देनी थी. फैसला करना मुशकिल था लेकिन करना तो था. कुछ क्षण उन दोनों को अपने होशोहवास काबू में लाने में पड़े. दीपक ने अपने कंधे पर पड़े अंगौछे में अपने होंठों के दोनों ओर से बह रही तंबाकू की पीक को समेटा तो इसी बीच निर्मला ने अपने होशोहवास को काबू में किया.

‘‘पटवारी साहब की बात सुनते ही मेरे तो होश उड़ गए,’’ दीपक ने आगे बताना शुरू किया, ‘‘जमीन बापू के नाम है, यह बात पटवारी को मालूम थी लेकिन हम बापू को रात में ही घर से निकाल चुके हैं, यह बात पटवारी को नहीं मालूम थी और इसीलिए वह बापू से मिलने घर पर आ रहा था. मैं ने भी तुरंत अपना दिमाग भिड़ाया और पटवारी साहब से कह दिया कि बापू तो अम्मा को तीर्थ करवाने ले गया है और 2-3 महीने से पहले नहीं लौटेगा. मेरी बात सुनते ही पटवारी साहब बोले, ‘फिर तो बहुत बड़ी समस्या हो गई दीपू, कंपनी वाले साहब को तो जमीन का जो भी करना है 3-4 दिनों में ही करना है.’ पटवारी साहब की बात सुनते ही मैं ने एक बार फिर से अपना दिमाग चलाया और उन्हें बताया कि अगर वह चाहे तो काम बन सकता है. उन्होंने पूछा, ‘कैसे?’ तो मैं ने उन से कहा कि जाने से पहले बापू कुछ कोरे कागजों पर साइन कर गए थे. अगर आप चाहें तो उन कागजों से बात बन सकती है.

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