बस साहब, अब हमें और क्या चाहिए था. मिजाज गद्गद हो गया. अपने पड़ोसी के विनाश के सामने तो मेरे लिए इस से बड़ा सुख कुछ न था. मैं ने जोश में आ कर वकील साहब को 5 हजार रुपए नजर किए और खुशीखुशी घर आ गया. हमारा सारा गम जाता रहा. दूसरे दिन केस ‘मूव’ हो गया.

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