इंसुलिन ही अब उन की जिंदगी की डोर थी. वैसे भी अब तो सावित्री के साथ जीने की लालसा ने इस कष्ट को सामान्य कर दिया था. उन की इस सिसकारी पर सावित्री ने कहा, ‘‘इतने सालों से इंजेक्शन ले रहे हो, पर सिसकारी भरना नहीं भूले. कोई छोटे बच्चे तो हो नहीं, जो इंजेक्शन लगते ही सिस्स...सिस्स... करने लगते हो.’’

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