आदिल खान परेशान थे. कई बार अब्बा के पास आकर अपना दुखड़ा रो चुके थे. परेशानी थी एक पीपल का पेड़, जो उनके घर के ठीक पीछे अपनी जड़ें गहरी कर उनकी पूरी छत पर अपनी टहनियां फैला चुका था. उनके घर के पीछे की जमीन नगर निगम की थी, जहां कोई निर्माणकार्य नहीं हो सकता था, मगर किसी ने पीपल के तने के चारों ओर चबूतरा बना कर भगवान की मूर्ति स्थापित कर दी थी. यह कई बरस पहले की बात है. तब आदिल चाचा जवान हुआ करते थे और पीपल का पेड़ भी तब बच्चा ही था. मगर बीते चालीस बरसों में आदिल खान की जवानी ढलती गई और पीपल का फैलाव बढ़ता गया. अब तो इसके चारों तरफ कुछ दबंग लोगों ने जमीन कब्जा करके खाने पीने के ढाबे बना लिए हैं. पहले ढाबे ऊपर से खुले हुए थे, मगर धीरे-धीरे उन पर छत भी पड़ गई. पहले टिन की और बाद में पक्की ईटों की.

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