श्री चाटुकार चरन सरोज रज, निज मनु मुकुर सुधारि. बरनउं चाटुकार बिमल जसु जो दायक फल चारि. बुद्धिहीन खुद को जानिके सुमिरौं चाटुकार कुमार. संबल, साहब का प्यार देहु मोहिं, मैं हूं निपट गंवार.

मतलब, इस जगत के सभी क्लास के चाटुकारो, आप पर कुछ लिखने से पहले आप को मेरा कोटिकोटि प्रणाम. उम्मीद है कि आप मुझे इस गुस्ताखी के लिए माफ करेंगे.

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