‘‘सुनो, दीदी का फोन आया  था,’’ पति को चाय का प्याला पकड़ाते हुए प्रतिभा ने सूचना दी.

‘‘क्या कह रही थीं? कोई खास बात?’’ आलोक ने अपनी दृष्टि प्रतिभा के चेहरे पर गड़ा दी.

‘‘कुछ नहीं, यों ही परेशान थीं, बेचारी. अब देखो न, 5 वर्ष रह गए हैं जीजाजी को रिटायर होने में, अब तक न कोई मकान खरीदा है न ही प्लौट लिया है. अपनेआप को वैसे तो जीजाजी बुद्धिमान समझते हैं पर देखो तो, कितनी बड़ी बेवकूफी की है उन्होंने,’’ कहते हुए प्रतिभा ने ठंडी सांस भरी.

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