अब तक की कथा :

मानसिक तनाव, शारीरिक थकान तथा अंधकारमय भविष्य की कल्पना ने दिया की सोचनेसमझने की शक्ति कमजोर कर दी थी. घुटन के अतिरिक्त उस के पास अपना कहने के लिए कोई नहीं था. सास के साथ मंदिर जाने पर वहां उस को एक साजिश का सुराग मिला. वह अपने साथ घटित होने वाले हादसों के रहस्य को समझने की अनथक चेष्टा करने लगी.

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