पर्यटन की अपनी ही खुशबू है. आप को रेल में जगह मिले या नहीं, होटल कैसा है, इन सब की फिक्र नहीं रहती. घूमने का जनून जिसे होता है वह दूरदूर तक निकल आता है. मेरे पास मुंबई का शराफत बैठा था. वह वहां इंजीनियर है. सुंदर पत्नी और 2 बच्चे उस के साथ थे. सभी बहुत खुश थे.

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