एक फकीर किसी बंजारे की सेवा से इतना खुश हो गया कि उस ने बंजारे को अपना एक गधा दे दिया. बंजारा बड़ा खुश था गधे के साथ. अब उसे पैदल नहीं चलना पड़ता था, न ही अपना सामान कंधे पर ढोना पड़ता. और गधा था भी बड़ा स्वामीभक्त. लेकिन एक दिन गधा अचानक बीमार पड़ गया और मर गया. बंजारे ने गधे की कब्र बनाई. वह कब्र के पास बैठ कर रो रहा था. तभी सौदागारों का एक कारवां उधर से गुजरा. सौदागरों ने सोचा, जरूर किसी पहुंचे हुए पीर की मौत हो गई है. वे भी कब्र के सामने झुके. उन्होंने बहुत से रुपए कब्र पर चढ़ाए. बंजारे को यह सब देख कर हंसी आ रही थी.

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