रेडियो कार्यक्रम मन की बात 27 अगस्त, 2017 के संस्करण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खेल की बात की. यह बात महज एक सूचना भर थी कि खेल मंत्रालय 28 अगस्त को एक पोर्टल लौंच करने वाला है और इस दिन इस पोर्टल का लौंच कर दिया गया.

इस पोर्टल के जरिए देश के हर कोने से खेल प्रतिभाओं को ढूंढ़ा जाएगा, जिस में कोई भी बच्चा या उस के मातापिता, कोच या शिक्षक इस पोर्टल में अपना बायोडाटा या वीडियो अपलोड कर सकता है. खेल मंत्रालय प्रतिभावान खिलाडि़यों को चुनेगा और उन्हें भारतीय खेल प्राधिकरण के केंद्रों में प्रशिक्षण देगा.

लेकिन खेल प्रतिभा पोर्टल तक वही खिलाड़ी पहुंच पाएंगे जो तकनीक और मुख्यधारा से जुडे़ हैं. गांवदेहात और जिला स्तर तक लोग अभी तकनीकी तौर पर इतने उन्नत या जागरूक नहीं हुए हैं कि अपने खेल प्रदर्शन का वीडियो बना कर पोर्टल पर डाल पाएं.

परंपरागत खेलों के खिलाड़ी कैसे अपनी प्रतिभा खेल मंत्रालय तक पहुंचाएंगे, यह प्रधानमंत्री के मन की बात से स्पष्ट नहीं हुआ और न ही यह किसी को समझ आया कि इस बात की क्या गारंटी है कि चयन निष्पक्ष होगा.

समय के साथ तकनीक को अपनाना अच्छी बात है बशर्ते उस से सभी लोग जुड़े हों और ईमानदारी का आश्वासन देती हो. खेल दिवस पर मन की इस बात पर गंभीरता से किसी ने ध्यान दिया हो, ऐसा लगता नहीं क्योंकि इस तरह की बात और आश्वासन लोग सुनते आए हैं.

खेल प्रतिभाएं सुविधाओं और प्रोत्साहन के अभाव में दम तोड़ रही हैं. यह बात सब को मालूम है. यह पोर्टल सिर्फ शहरी अभिजात्य वर्ग के लिए उपयोगी होगा जो इंडोर गेम्स खेलते हैं. इस वर्ग के लिए खेल एक शौक और कैरियर भर है.

बैडमिंटन, शतरंज, टैनिस वगैरा के खिलाड़ी इस पोर्टल का लाभ ले सकते हैं पर कुश्ती, कबड्डी और दूसरे ऐथलैटिक्स खेलों के मेहनती खिलाड़ी जो मूलतया गांवकसबों से निकलते हैं, वे कैसे इस तक पहुंचेंगे, यह बात जब तक साफ नहीं होगी तब तक ऐसे पोर्टल के कोई माने नहीं.

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