छोटा सा कद. ज्यादा वजन भी नहीं और उम्र महज 18 साल. यह सौरमंडल का कोई नया ग्रह नहीं है पर चमकता किसी सितारे की तरह है. हम बात कर रहे हैं मुंबइया क्रिकेटर पृथ्वी शौ की जिन्होंने हाल ही में वेस्टइंडीज के साथ हुई 2 मैचों की टेस्ट सीरीज से अपने टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत की और धमाल मचा दिया. इन 2 टेस्ट मैचों में पृथ्वी शौ ने 237 रन बनाए. रन बनाने की औसत रही 118.5 और स्ट्राइक रेट 94 थी. इस में एक शतक और एक अर्धशतक शामिल था.

पृथ्वी शौ ने राजकोट में खेले गए अपने पहले टेस्ट मैच की पहली पारी में शानदार 134 रन बनाए थे. इस मैच में भारत एक पारी और 272 रनों से जीता था. हैदराबाद में खेले गए दूसरे मैच में पृथ्वी शौ ने पहली पारी में ताबड़तोड़ 72 रन बनाए थे जबकि दूसरी पारी में वे 33 रन बना कर नाबाद रहे थे. नतीजतन, भारत ने इस सीरीज में जीत हासिल की और पृथ्वी शौ के हाथ में थी ‘मैन औफ द मैच’ की चमचमाती ट्रौफी.

अपने पहले ही टेस्ट मैच में शतक जमाने वाले पृथ्वी शौ के उम्दा खेल से भारतीय टीम के कोच रवि शास्त्री इतने खुश हुए कि उन्होंने पृथ्वी को सचिन तेंदुलकर, ब्रायन लारा और वीरेंद्र सहवाग का ‘डेडली कौम्बिनेशन’ बता दिया.

पृथ्वी शौ की तेजतर्रार बल्लेबाजी के खुद सचिन तेंदुलकर कायल हैं. उन्होंने पृथ्वी की तारीफ करते हुए कहा, “बिना डर के बल्लेबाजी करना जारी रखो.”

पृथ्वी शौ को भी सचिन तेंदुलकर की तरह बल्लेबाजी करना पसंद है लेकिन साथ ही वे हमेशा पृथ्वी ही बने रहना चाहते हैं.

पृथ्वी शौ का पहला टेस्ट तो अव्वल दर्जे में पास हुआ है पर असली इम्तिहान तो अभी आना बाकी है. मुंबई के बाहरी इलाके विरार में पले बढ़े इस ‘टाइनी लिटिल मास्टर’ को अगर टीम में जगह मिली तो औस्ट्रेलिया में अपना हुनर दिखाना होगा.

पर अपने पिता पंकज शौ का लाडला यह बच्चा इस बात से न तो हैरान है और न ही परेशान है. उसे इस बात का भी डर नहीं है कि क्रिकेट के कुछ माहिरों को उस के खेल में कई तकनीकी कमियां दिखाई देती हैं. वे तो बेखौफ हो कर कहते हैं,” मुझे नहीं पता आगे क्या होने वाला है. मैं तो अभी इस पल का मजा ले रहा हूं. मैं भारत के लिए खेलते हुए ज्यादा से ज्यादा मैच जीतना चाहता हूं, वर्ल्ड कप भी.”

भले ही कमजोर दिखने वाली वेस्टइंडीज टीम के साथ टेस्ट क्रिकेट की शुरुआत कर पृथ्वी शौ ने बेहतरीन शुरुआत की है लेकिन उन के खेलने की काबिलियत तो बचपन में ही उन के पिता को पता चल चुकी थी तभी तो आज महज 18 साल की उम्र में उन्होंने डोमेस्टिक क्रिकेट में इतने रिकौर्ड बना दिए हैं कि अगर उन का खेल पर ही फोकस रहा तो वे आने वाले कई साल तक क्रिकेट की दुनिया के चमकते सितारे बने रहेंगे.

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