वक्त बदला, समाज बदला और बदल गए बचपन के खेल. तकनीक ने जहां काम को आसान बनाया है वहीं कुछ मुश्किलें भी पैदा की हैं. खासकर बचपन को सब से ज्यादा प्रभावित किया है.

एक समय था जब बच्चे खेल के मैदानों में घंटों अपने दोस्तों के साथ गिल्ली डंडा, कंचा, कबड्डी, छुपनछिपाई, पिट्ठू, चोरसिपाही, सांपसीढ़ी और न जाने क्याक्या खेलते थे. खेल में इतना मस्त रहते थे कि खानेपीने तक की फुरसत नहीं रहती थी, पर अब ऐसा नहीं है.

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