जिन संस्थाओं पर जनता भरोसा करती है और जहां उसे लगता है कि मामले की जांच सही तरह से नहीं की जा रही है तो मांग की जाती है कि फलां संस्था से जांच कराई जाए ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके. अगर जनता अपनी भरोसमंद संस्था के बारे मे ऐसा सोचती है तो वह मुगालते में है.

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