कोई वजह नहीं कि नक्सलियों से किसी तरह की हमदर्दी रखी जाए जो बंदूक की नोक पर शोषकों के खात्में का ख्वाब देखते और दिखाते हैं. हिंसा तो आखिर हिंसा है, उस से किसी समस्या का समाधान नहीं होता. वहीं, कोई वजह नहीं कि 28 अगस्त को गिरफ्तार किए गए उन 5 विचारकों, लेखकों व मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी से, सिर्फ इसलिए कि उन पर एक ब्रिगेड ने अरबन नक्सल का बिल्ला लगा दिया, असहमति न जताई जाए जो बिलकुल अहिंसकरूप से गरीब आदिवासियों और दलितों के हितों के लिए वैचारिक व बौद्धिक रूप से काम कर रहे थे.

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