छत्तीसगढ़ में लगभग दो दशक  से हाथी एवं मानव का द्वंद अपने चरम पर है. आए दिन जंगली दंतेल हाथी के पैरों तले छत्तीसगढ़ के आदिवासी मारे जा रहे हैं. मगर चारों तरफ सन्नाटा व्याप्त है. विधानसभा हो या मंत्री अथवा जननेता कहे जाने वाले चंद लोग सब सो रहे हैं. किसी को कोई मतलब नहीं कि आम आदमी किस तरह हाथी के पैरों के नीचे कुचला जा रहा है. चारों तरफ सिर्फ औपचारिकता ही निभाई जा रही है .सच यह है कि छत्तीसगढ़ में हाथियों का उत्पात थमने का नाम नहीं ले रहा है.विगत  26 नवंबर को  छत्तीसगढ़ के जिला  महासमुंद में धान की रखवाली कर रहे दो युवको को दंतैल हाथी ने कुचलकर मौत के घाट उतार दिया . उन लोगों की घटनास्थल पर ही करूण मौत हो गई. दुःखद    बात यह है कि 25 नवंबर से छत्तीसगढ़ का विधानसभा का सत्र शुरू हो चुका है।इस महत्वपूर्ण मसले पर एक भी विधायक ने  न तो सुन्य  काल में आवाज बुलंद की न हीविधायक ने किसी ने काम रोको का नोटिस देकर सरकार का ध्यान आकर्षित करने की कोशिश की.छत्तीसगढ़ में मचे हाथी और मानव के द्वंद पर प्रस्तुत एक खास रिपोर्ट-

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