फुटपाथों पर बनी झुग्गियों और बाजारों से सरकार और प्रशासन अनजान नहीं होते हैं या गरीबों पर रहम खा कर उन्हें फुटपाथों पर कारोबार करने या बसने के लिए छोड़ दिया जाता है. इस के पीछे हरे नोटों की चमक काम करती है. रिटायर्ड पुलिस अफसर एसके भारद्वाज बताते हैं कि फुटपाथ पर रहने वालों या कोई कामधंधा करने वालों को इस के एवज में अच्छीखासी रकम चुकानी पड़ती है. फुटपाथियों को पुलिस वाले और लोकल रंगदार दोनों की मुट्ठी गरम करनी पड़ती है.

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