नई दिल्ली. कहते हैं कि सपनों को हकीकत में बदलना नामुमकिन नहीं है, अगर कोई भी व्यक्ति पूरी मेहनत और लगन के साथ उसे सच करने की ठान ले तो वो कभी असफल नहीं हो सकता है. इसका ताजा उदाहरण पेश किया है उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण की क्षेत्रीय प्रबंधक डॉ. स्मिता सिंह ने. जिन्होंने 31 साल के लंबे अंतराल के बाद आखिरकार पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर ली है. लेकिन खास बात ये है कि उन्होंने पीएचडी करने के सपने को छोड़ा नहीं और जिसका नतीजा है कि उनकी कड़ी मेहनत रंग लाई है और करीब 31 साल बाद उन्होंने अपने सपने को हकीकत में बदलकर दिखाया है.

अगर डॉ. स्मिता की शिक्षा की बात करें तो वह इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से मैनेजमेंट में गोल्ड मेडलिस्ट रह चुकी हैं और उन्होंने पीएचडी करने के लिए साल 1990 में ही यूजीसी नेट क्वालीफाई भी कर लिया था, जिसके बाद वे पब्लिक सर्विस में आ गईं. इसके अलावा उन्होंने इस्पात उद्योग में सेल व टाटा स्टील को रिसर्च में रखते हुए इसकी तैयारी की.

लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि डॉ. स्मिता को काम के दौरान जब भी समय मिलता था वह तैयारी में जुटी रहती थी. भले ही उन्हें पीएचडी की उपाधि को पाने में लंबा वक्त लगा हो, लेकिन इसके मिलने की खुशी उन्हें उतनी ही है जितनी की एक छात्र को परीक्षा में मिलनेवाली असाधारण सफलता पर मिलती है. वहीं डा. स्मिता सिंह ने कहा कि नाम के आगे डॉक्टर लिखा जाना अपने आप में गर्व की बात है.

ये वही डॉ. स्मिता सिंह हैं जिन्होंने अपनी कार्यशैली से यूपी के औद्योगिक शहर गाजियाबाद का व्यापार के क्षेत्र में काया पलट कर दी है. स्थानीय व्यापरी स्मिता सिंह के कुछ इस तरह कायल हुए हैं कि,  वह स्पष्ट कहते हैं कि, अधिकारी हो तो ऐसा. लोगों का मानना है कि, स्मिता सिंह के पास जो भी अपनी समस्या लेकर गया, निराश होकर नहीं लौटा, सबकी समस्या का समाधान उन्होंने पूरी ईमानदारी से किया.

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