54 साल के रामकेवल सरकारी नौकरी करते है. शहर और गांव में उनका अच्छा घर है. गांव में उनकी इज्जत वैसी नहीं है जैसी ऊंची जातियों के लोगों की होती है. गांव की सडक से जब रामकेवल गुजरते है तो कुछ लोग नमस्कार जरूर कर लेते है पर उसका श्रद्वा भाव वैसा नहीं होता जैसा ऊंची जाति के लोगों के प्रति होता है. ऊंची जाति लोग जब राह से गुजरते है तो दूर से ही ‘बाबा पैलगी‘ होने लगती है.

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