Mountain Tourism Rules : हर साल पहाड़ों पर कोई न कोई भयंकर प्राकृतिक आपदा घटती रहती है जिस में जानमाल की हानि होती है. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि पहाड़ों पर इंसानों ने अतिरिक्त बोझ लाद दिया है और ऐसा पर्यटन बढ़ाने के चलते हुआ है.

उत्तराखंड के धराली में 60 सैकंड में जो तबाही हुई थी उस में 4 लोगों के मरने और तमाम लोगों के गायब होने की घटना घटी. इस का कारण ऊंचाई पर स्थित खीर गंगा नदी के जलग्रहण क्षेत्र में बादल फटने से आई बाढ़ देखते ही देखते कई घरों, होमस्टे और बाजार को अपने साथ बहा ले गई. आफत ऐसी आई कि लोग भाग भी न सके. मलबे में कई लोग दब गए. करीब 20 से 25 होमस्टे पूरी तरह से नष्ट हो गए. घटना के समय लोगों के पास भागने तक का समय न था.

40 से 50 इमारतें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गईं. सब से अधिक तबाही धराली के मुख्य बाजार क्षेत्र में हुई जहां कई होटल, दुकानें और घर पूरी तरह से नष्ट हो गए. बहुत भारी बारिश के कारण भूस्खलन और अचानक बाढ़ का खतरा लगातार बढ़ गया. सरकार को कक्षा 1 से 12 तक के स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखने का आदेश जारी करना पड़ा. उत्तराखंड की धरती एक बार फिर प्राकृतिक आपदा की मार झेल रही है.

धराली की त्रासदी ने एक बार फिर बताया है कि कैसे जलवायु परिवर्तन और पहाड़ी इलाकों की नाजुक भौगोलिक स्थिति मिल कर कहर बरपा सकते हैं. जरूरत इस बात की है कि उत्तराखंड की भौगोलिक स्थिति समझ कर योजनाएं बनाई जाएं. सड़कों पर बस, कार का चलना केवल सेना और सर्विस के लिए हो. पर्यटन के लिए पहाड़ों पर पैदल ही लोग जाएं. होटल की जगह टैंट का प्रयोग करें.

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