Social Problems: वास्तव में जाति और लिंग आधारित व एकपक्षीय जितने भी कानून देश में बने हैं उन का सदुपयोग से अधिक दुरुपयोग होता रहा है. हिंसा, प्रतिहिंसा, आत्महत्या, दुष्कर्म आदि घटनाओं की भी रिपोर्टिंग व डाटा कनैक्शन जाति के आधार पर करने वाले राजनीतिक दल और मीडिया क्या समाज के भले के लिए ये सब करते हैं? नहीं, केवल राजनीतिक आकाओं को खुश करने के लिए और राजनीतिक लाभ उठाने के लिए ऐसा किया जाता है.
आपसी कहासुनी व रंजिश का कारण कोई भी हो, मीडिया लिखेगा फलां जाति/वर्ग के युवक/युवती के साथ घटना हुई, जबकि ऐसा ही किसी कथित उच्च वर्ग के साथ होने पर वह स्टोरी सनसनीखेज नहीं रह जाती.
हिंदू धर्म को विभाजित करने/रखने के जितने भी तरीके हो सकते हैं वे सब फर्जी धर्मनिरपेक्षता के अलम्बरदारों और उन के ईको सिस्टम (जिस में दिल्ली प्रैस भी शामिल है) के फेवरेट हैं अन्यथा सारी बुराइयों का ठीकरा हिंदू पर थोपने वालों ने दूसरे मजहबों के रीतिरिवाजों की कभी समीक्षा नहीं की बल्कि अमानवीय प्रथाओं तक को उन का संवैधानिक अधिकार बता कर पक्ष लिया है.
क्या आप को पता नहीं है आर्य समाज, गायत्री परिवार जैसे धार्मिक व सामाजिक संगठन सभी जाति के लोगों को विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान करवाने के लिए प्रशिक्षण देते हैं. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद जैसे संगठन सभी जाति-वर्गों को साथ ले कर काम करते हैं.
कभी इन के काम पर भी अपनी कलम को कष्ट दीजिए. Social Problems
लेखक - राकेश
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