यौनशोषण से आजिज आ कर पीडि़त महिलाओं ने हिम्मत दिखानी शुरू कर दी है. उन की इस हिम्मत को मी टू नाम दिया गया. मी टू यानी मैं भी. अमेरिका से शुरू हुए इस मी टू अभियान में अब भारत की पीडि़ताएं भी शामिल हो गई हैं.

यौनशोषण के किस्से, हालांकि भारत में धार्मिक कहानियों में भरे पड़े हैं. धर्म और पुरुषप्रधान समाज शोषण के लिए हमेशा नारी को ही जिम्मेदार मानता रहा है. शोषण की शिकार नारी को ही अपराधभाव से देखा जाता था. महिला अपने अपराधभाव से मुक्त होने के लिए पुरुष की शरण में जाने को मजबूर होती थी.

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