छुट्टा जानवरों से खेत और फसल को सुरिक्षत रखने के लिये उत्तर प्रदेश की मोदी सरकार ने ‘पशु आश्रय केन्द्र’ ग्राम पंचायत स्तर पर खोलने का फैसला किया था. जिसके तहत कटीले तार के बाड़े और पानी भरी खाई को खोद कर ग्राम प्रचायतों में ‘पशु आश्रय केन्द्र’ बनाये गये. इनमें जानवरों के चारा पानी और देखभाल के लिये सरकार द्वारा बजट भी स्वीकृत किया है.

गरमी के मौसम में यह आश्रय केन्द्र पशुओं के लिये कैदखाने बन गये है. ‘पशु आश्रय केन्द्र’ के पेड़ की छांव न होने के कारण गरमी के माह में पशुओं को धूप का मुकाबला करना पड़ रहा हैं. इसके अलावा खराब प्रबंधन के कारण ‘पशु आश्रय केन्द्र’ केन्द्र में चारे की समुचित व्यवस्था भी नहीं हो रही है.

अब भूखे प्यासे और धूप को तडप रहे पशुओं को इन ‘पशु आश्रय केन्द्र’ से बाहर भगा दिया जा रहा है. जिसकी वजह से पशु फिर से खेतों को नुकसान पहंचा रहे हैं और ‘पशु आश्रय केन्द्र’ खाली पड़े है. उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सबसे प्रमुख तहसील मोहनलालगंज के ‘पशु आश्रय’ के हालात बताते है कि ‘पशु आश्रय केन्द्र’  किस हालत में अव्यवस्था का शिकार होकर ‘पशु आश्रय केन्द्र’ की जगह पर कैद खाने बन कर रह गये हैं.

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जानकारों की माने तो मोहनलालगंज तहसील के परहेटा, कुढा, कमालपुर बिचलिका सहित कई ‘पशु आश्रय केन्द्र’ पूरी तरह से खाली हो चुके हैं. दूसरे ‘पशु आश्रय केन्द्र’ भी अव्यवस्था का शिकार हो रहे है. यहां पर छांव और पानी की कमी के साथ पशुओं के खाने को भी भोजन नहीं है. गरमी बढ़ने से यह पशु अब बेहाल हो रहे हैं.

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