सरकार व्हाट्सऐप, इंस्टाग्राम, टिकटौक जैसे औनलाइन डिजिटल प्लेटफौर्मों के पीछे पड़ी है कि उन पर डाली गई सामग्री का सोर्स पता चल जाए और अगर कोई गलत सामग्री हो, तो पोस्ट करने वाले को पकड़ा जा सके. यह तो साफ है कि डिजिटल पोस्ट प्लैटफौर्म युवाओं को अपनी बात कहने और अपनी कला दिखाने का अद्भुत मौका दे रहे हैं. अब तक मजमा जमा करना, महंगे इक्विपमैंट से वीडियो बनाना और किसी भी तरह जानेअनजाने लोगों को दिखाना या उन से कुछ कहना संभव नहीं था. चाय की दुकान पर 5-7 लोगों को दिखाने या बताने में क्या मजा है?

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