रूह कंपा देने वाली ठंड में ऐसी वारदातें जब सामने आती हैं तो दिल सोचने पर मजबूर हो जाता है कि आखिर इन का कुसूर यही है कि वे मजबूरी में यहां लाई गई हैं. वजह कुछ भी हो, पर इस सनसनीखेज खुलासे ने कइयों की नींद हराम कर दी है.

महिला आयोग की टीम जब  रात 8 बजे दौरे पर निकली तो द्वारका, दिल्ली के शेल्टर होम की कुछ लड़कियों ने आपबीती बता कर झकझोर दिया. सदस्यों ने वहां रहने वाली 6 से 9 साल, 10 से 13 साल व 13 से 15 साल की बच्चियों से अकेले में बात की तो बड़ी उम्र की लड़कियों ने हकीकत बयां की.

‘शेल्टर होम में सजा देने के लिए लड़कियों को जबरन मिर्च पाउडर खिलाया जाता है. सब के सामने प्राइवेट पार्ट में मिर्च पाउडर डाला जाता है ताकि बड़ी लड़कियां डर कर रहें.’ ये शिकायतें द्वारका के एक प्राइवेट शेल्टर होम की लड़कियों ने लगाई हैं.

इस शेल्टर होम में इन लड़कियों की आपबीती सुन कर टीम के सदस्य चौंक गए. पुलिस को इस की सूचना दी गई और शेल्टर होम के स्टाफ के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली गई.

बता दें कि दिल्ली सरकार की सलाह पर दिल्ली महिला आयोग ने सभी सरकारी और प्राइवेट शेल्टर होम की जांच करने और उन में सुधार की सलाह देने के लिए एक्सपर्ट कमेटी बनाई है.

बड़ी उम्र की लड़कियों ने टीम के सदस्यों को बताया कि उन को शेल्टर होम में सारे घरेलू काम करने पड़ते हैं. यहां स्टाफ बहुत कम है, इसलिए बड़ी लड़कियां ही छोटी लड़कियों की देखभाल करती हैं. बड़ी लड़कियों से बरतन धुलवाए जाते हैं. कमरे और टायलेट साफ करवाए जाते हैं वहीं दूसरी ओर 22 लड़कियों के लिए एक ही रसोइया है. यहां खाने की क्वालिटी भी बेहद खराब होती है. बात न मानने पर छोटी बच्चियों को कड़ी सजा दी जाती है, जिस से सब लड़कियां डर कर रहती हैं.

अनुशासन के नाम पर शेल्टर होम वाले बात न मानने पर छोटी बच्चियों को जबरदस्ती मिर्च खिलाते हैं. महिला स्टाफ बच्चियों के प्राइवेट पार्ट में मिर्च डाल देती हैं. कमरा साफ न करने, स्टाफ की बात न मानने पर फुटा यानी स्केल से पीटा जाता है. गरमियों और सर्दियों की छुट्टियों में घर भी नहीं जाने दिया जाता है.

समिति की शिकायत पर द्वारका सेक्टर-23, दिल्ली थाना पुलिस ने पाक्सो व जुवैनाइल जस्टिस ऐक्ट के तहत मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है.

बच्चों की अपील पर आयोग ने समिति से आग्रह किया कि बच्चों को दूसरी जगह न भेजा जाए, बल्कि शेल्टर होम के स्टाफ को हटाया जाए.

भले ही फौरीतौर पर कार्यवाही की गई है पर एक बात तो सच है कि शेल्टर होम भी शोषण का अड्डा बने हुए हैं. शेल्टर होम के स्टाफ को हटाना कोई समस्या का समाधान नहीं है, बल्कि उन पर सख्त कार्यवाही होती तो बेहतर होता.

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