ऊंची जाति वालों को बेवजह ही कोसा और बदनाम किया जाता है कि वे दलितों को मंदिरों में जाने और पूजा पाठ करने से रोकते हैं और इसके लिए जरूरत पड़े यानि दलित न माने तो उनके साथ मार पीट हिंसा और कभी कभी तो उनकी हत्या तक कर डालते हैं. सच तो यह है कि दलितों से ज्यादा ये सवर्ण चाहते हैं कि दलित भी पूजा पाठ व्रत उपवास सब करें पर शर्त इतनी है कि उनके साथ न करें क्योंकि दलित योनि में पैदा होना पिछले जन्मों के पापों की सजा है और दलित को बराबरी से बैठाना ऊंची जाति वालों के लिए मना है क्योंकि वे अगर दलितों से बराबरी का व्यवहार करेंगे जैसा कि दलित चाहते हैं तो उन्हें यह कैसे समझ आएगा कि वे किन कर्मों और पापों की सजा भुगतने धरती पर पैदा किए गए हैं.

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