Education System: काकरोच जनता पार्टी का मकसद और मनसूबे बेहद साफ़ हैं कि देश केवल संविधान के मुताबिक चलना चाहिए. नीट पेपर लीक के विरोध में उसके एतिहासिक प्रोटेस्ट के बाद दूसरी जीत उसे एक सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट में हासिल हुई जहाँ सरकार के साथ साथ सीजेआई भी हारे. अब हर कोई उत्सुकता से सीजेपी की तरफ देख रहा है कि सरकारी स्कूल ठीक करने के बाद वह किस मुद्दे पर आंदोलन करेगी और अगर वह चुनावी राजनीति में न उतरी तो सियासी तौर पर उससे किस पार्टी को फायदा होगा.
नजारा और माहौल दोनों निकाह होने जैसे थे जिसमे काजी बारी बारी से वर वधु से पूछता है कि आपका निकाह फलां वल्द फलां के साथ मैहर की इतनी रकम के साथ तय हुआ है क्या आपको कुबूल है. जब दूल्हा दुल्हन दोनों हाँ, कुबूल है बोल देते हैं तो मौजूदा मेहमान मुबारक हो मुबारक हो कहते दावत उड़ाने चल देते हैं बीती एक सितम्बर को सुप्रीम कोर्ट में ऐसा ही कुछ हुआ. जिसकी स्क्रिप्ट पहले ही लिखी जा चुकी थी. बात कुछ कुछ मियां बीबी राजी तो क्या करेगा काजी सरीखी ही थी. 20 जुलाई को काकरोच जनता पार्टी के जंतर मंतर प्रोटेस्ट के बाद जिन प्रदर्शनकारी छात्रों पर एफआईआर दर्ज की गईं थीं उन्हें सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रद्द कर दिया गया.
कोर्ट ने निर्देश दिए कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में छात्रों के खिलाफ दर्ज सभी मामले रद्द माने जाएंगे. और भविष्य में उसी विरोध प्रदर्शन के संबंध में कोई नया मामला दर्ज नहीं किया जाएगा.
सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे सलिस्टर जनरल तुषार मेहता को इसमें कुछ खास नहीं करना था. जिन्होंने कोर्ट को बताया कि दोनों पक्षों ने इस मामले को रचनात्मक और सकारात्मक तरीके से सुलझाया है. बकौल तुषार मेहता हम दुश्मन नहीं हैं. हम यानी सरकार और छात्र. सुनवाई कर रही पीठ की अगुवाई कर रहे चीफ जस्टिस सूर्यकांत भी इस समझौते से खुश थे कि चलो सस्ते में पिंड छूटा. नहीं तो ये काकरोच पांच सितम्बर से फिर आंदोलन करते जो पहले से कहीं ज्यादा बड़ा होता.
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