बड़े अफसोस की बात है कि हम आजादी की 70वीं सालगिरह मना रहे हैं पर अभी भी अफवाह पर विश्वास और अंधविश्वासों से मुक्त नहीं हो पाए हैं. हमारा एक पैर चांद पर है तो दूसरा दकियानूसी सोच के दलदल में धंसा हुआ है.

जून माह में पश्चिम राजस्थान के गांवों से महिलाओं के बाल काटने की एक दो घटनाओं से शुरू हुआ अफवाहों का जिन्न मध्यप्रदेश, हरियाणा, पंजाब, उत्तरप्रदेश और देश की राजधानी दिल्ली तक जा पहुंचा. आए दिन 2-3 अविश्वसनीय अफवाहें मीडिया खासतौर से इलेक्ट्रोनिक चैनलों की सुर्खियों में छाई रही हैं.

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