सपा नेता और प्रौपर्टी डीलर चंद्रपाल ने गुंडे दिलीप को न केवल जेल जाने से बचाया बल्कि उसे अपना सुरक्षा गार्ड बना कर साथ भी रख लिया. सुरक्षा के लिए उसे हथियार भी दे दिया. जब दिलीप की नजरें चंद्रपाल की बीवी सोनी से लड़ीं तो दिलीप ने उसी हथियार से चंद्रपाल की हत्या कर दी.

उत्तर प्रदेश के जिला संभल से करीब 25 किलोमीटर दूर है चंदौसी शहर. चंदौसी में देशी घी और मैंथा औयल की मंडियां हैं. जिन की वजह से इस शहर की पहचान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बनी हुई है. चंदौसी के हनुमान गढ़ी मोहल्ले में चंद्रपाल माली अपने परिवार के साथ रहते थे. उन के परिवार में पत्नी सोनी के अलावा एक बेटा था. चंद्रपाल समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेता थे. इस के अलावा वह बड़े प्रौपर्टी डीलर भी थे.

बात 14 सितंबर, 2018 की है. शाम के करीब 5 बजे थे तभी कोतवाली प्रभारी विनय कुमार को पुलिस कंट्रोल रूम से सूचना मिली कि चंदौसी के हनुमान गढ़ी में रहने वाले सपा नेता चंद्रपाल माली को उन के घर में घुस कर किसी ने गोली मार दी है. यह सूचना मिलते ही कोतवाली प्रभारी विजय कुमार पुलिस टीम के साथ हनुमान गढ़ी स्थित उन के घर पहुंच गए.

वहां जा कर पता चला कि उन्हें अस्पताल ले जाया गया है. इंसपेक्टर विनय कुमार भी अस्पताल पहुंच गए. वहां जानकारी मिली कि 35 वर्षीय चंद्रपाल माली की मौत हो चुकी है. उन्होंने डाक्टरों से बात कर शव अपने कब्जे में ले लिया और इस की सूचना अपने आला अफसरों को दे दी. कुछ ही देर में सीओ कृष्णकांत सरोज वहां पहुंच गए.

सपा नेता चंद्रपाल माली की हत्या की खबर फैलते ही उन के समर्थकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और जानपहचान वालों में मातम छा गया. सभी को ताज्जुब हो रहा था कि आखिर ऐसा कौन है, जिस ने घर में घुस कर उन्हें गोली मार दी.

उधर जिला संभल के सपा के जिला अध्यक्ष फिरोज खां ने एसपी यमुना प्रसाद से मिल कर चंद्रपाल माली की हत्या पर दुख जाहिर किया और हत्यारों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की. एसपी ने फिरोज खां को भरोसा दिलाया कि पुलिस टीमें इस काम में लगा दी गई हैं और जल्द ही हत्यारे पुलिस के कब्जे में होंगे.

एसपी ने यह सूचना आईजी विनोद कुमार सिंह और मुरादाबाद बरेली मंडल के एडीजी प्रेम प्रकाश को भी दे दी. सपा कार्यकर्ताओं के संभावित विरोध प्रदर्शन को ध्यान में रखते हुए एडीजी प्रेम प्रकाश ने एसपी यमुना प्रसाद को चंदौसी शहर में पर्याप्त मात्रा में पुलिस तैनात करने के निर्देश दिए.

घटनास्थल का निरीक्षण करने के बाद इंसपेक्टर विनय कुमार ने मृतक के भाई मनोज माली से पूछताछ की तो उस ने कहा कि गोली की आवाज सुनने के बाद कुछ देर बाद जब वह भाई के कमरे में पहुंचा तो वह लहूलुहान पड़ा था. उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया. उस ने इंसपेक्टर को बताया कि उस के भाई की हत्या किसी और ने नहीं बल्कि उस की भाभी सोनी और उस के प्रेमी दिलीप ठाकुर ने मिल कर की है.

मनोज माली की बात सुनने के बाद इंसपेक्टर विनय कुमार के सामने मामले की तसबीर साफ होने लगी. यह बात उन्होंने सीओ कृष्ण कांत सरोज को बताई. इसलिए सीओ सरोज ने मृतक की पत्नी सोनी पर निगरानी रखने को कहा ताकि वह फरार न हो सके.

अगले दिन यानी 15 सितंबर को पुलिस ने जरूरी काररवाई पूरी कर लाश पोस्टमार्टम के लिए भेज दी. गोली चंद्रपाल के सीने पर मारी गई थी, लेकिन डाक्टरों ने जब पोस्टमार्टम किया तो उन्हें गोली नहीं मिली. जबकि वह बाहर भी नहीं निकली थी. डाक्टर हैरान थे कि जब गोली शरीर के बाहर नहीं निकली, तो वह गई कहां. उन्होंने पुलिस से कहा कि वह लाश का एक्सरे कराए ताकि गोली की स्थिति पता लग सके. इस पर पुलिस चंद्रपाल माली की लाश का एक्सरे कराने के लिए संभल के जिला अस्पताल ले गई.

संदेह के दायरे में पत्नी

एक्सरे के बाद पता चला कि जो गोली सीने में घुसी थी. वह फेफड़े, दिल, लीवर और छोटी आंत को फाड़ते हुए कूल्हे के ऊपर की हड्डी में जा कर फंस गई थी. एक्सरे होने के बाद पोस्टमार्टम करने वाले डाक्टरों ने गोली निकाली. वह गोली .315 बोर की थी.

पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने लाश घर वालों को सौंप दी. मृतक स्थानीय नेता ही नहीं बल्कि शहर का प्रतिष्ठित आदमी था इसलिए शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए अंतिम यात्रा के समय भारी पुलिस बल मौजूद रहा. अंतिम संस्कार के बाद पुलिस ने मृतक की पत्नी सोनी को उसी दिन पूछताछ के लिए थाने बुलाया.

पूछताछ में उस ने बताया कि शाम करीब साढ़े 4 बजे उस के पति अपने नौकर उमेश के साथ घर लौटे थे. उस समय दूसरे कमरे में ट्यूटर सोनू उस के 8 वर्षीय बेटे को ट्यूशन पढ़ा रहा था. वह टौयलेट गई हुई थी. उसी दौरान किसी ने पति को गोली मार दी.

इस के बाद इंसपेक्टर विनय कुमार ने ट्यूटर सोनू और घरेलू नौकर उमेश को थाने बुलाया. सोनू ने बताया कि शोरशराबा और गोली की आवाज सुनने पर जब वह बाहर आया तो चंद्रपाल लहूलुहान हालत में पड़े थे. उन्हें अस्पताल ले जाया गया.

इंसपेक्टर विनय कुमार ने चंद्रपाल के नौकर उमेश से पूछताछ की तो उस ने बताया, ‘‘शाम करीब 4 बजे मैं मालिक के साथ घर लौटा. मालिक अपने कमरे में चले गए तो मैं दूसरे कमरे में बैठ गया. कुछ देर बाद मैं ने मालिक के कमरे से गोली चलने की आवाज सुनी तो मैं तुरंत उन के कमरे की तरफ दौड़ा. उस कमरे में मालिक फर्श पर लहूलुहान पड़े थे, उन की पत्नी सोनी वहीं खड़ी थी और दिलीप भी था.’’

उमेश ने आगे बताया, ‘‘दिलीप के हाथ में तमंचा देख कर मैं समझ गया कि उसी ने मालिक को गोली मारी है. दिलीप वहां से भागने को हुआ तो मैं ने उसे दबोच लिया. सोनी दिलीप को छुड़ाने लगी, लेकिन मैं ने उसे नहीं छोड़ा. तभी सोनी ने मेरे कंधे पर काट लिया. इस से मेरी पकड़ ढीली हुई तो दिलीप वहां से भाग गया.’’

उमेश ने इंसपेक्टर विनय कुमार को अपना कंधा भी दिखाया, जहां सोनी ने काटा था. उमेश के कंधे पर गहरा घाव था. इस से इंसपेक्टर विनय समझ गए कि सोनी झूठ बोल रही है. यह सब उसी का कियाधरा है. मृतक के भाई ने भी सोनी और उस के प्रेमी दिलीप पर हत्या का आरोप लगाया था.

खुल गया हत्या का राज

इंसपेक्टर विनय कुमार ने सोनी से सख्ती से पूछताछ की तो उसे सच बोलने के लिए मजबूर होना पड़ा. क्योंकि नौकर उमेश को काटने की बात वह झुठला नहीं सकती थी. सोनी से पूछताछ के बाद उस के पति चंद्रपाल माली की हत्या की जो कहानी सामने आई वह चौंकाने वाली निकली.

चंद्रपाल माली की शादी मुरादाबाद के गोविंदनगर निवासी सोनी के साथ हुई थी. शादी के करीब एक साल बाद सोनी एक बेटे की मां बनी, जिस का नाम देव माली रखा. देव इस समय शहर के ही एक कौन्वेंट स्कूल में कक्षा 3 में पढ़ रहा है.

चंद्रपाल के पिता जगदीश माली जमीनों की खरीदफरोख्त का काम करते थे. चंद्रपाल ने भी पिता के पेशे को अपना लिया. चंदौसी से 25 किलोमीटर दूर संभल कुछ साल पहले ही जिला घोषित हुआ था.

जिला बनने के बाद संभल और आसपास के इलाकों की जमीनों के रेट आसमान छूने लगे थे. चंद्रपाल माली ने शहर में नई जगहों पर जमीनें खरीद कर डाल रखी थीं. वह धीरेधीरे इन जमीनों पर प्लौट काट कर बेच रहे थे.

करीब 6 महीने पुरानी बात है. चंद्रपाल चंदौसी के व्यस्ततम बाजार फव्वारा चौक पर स्थित एक स्टाल पर टिक्की खाने गए थे. फव्वारा चौक चंदौसी शहर की एक ऐसी मशहूर जगह है जहां शहर के संभ्रांत लोग चाट, पकौड़ी, मूंग की दाल, गोल गप्पे आदि खाने के लिए आते हैं. जब चंद्रपाल माली वहां खड़े टिक्की खा रहे थे, तभी अचानक वहां 3 लड़कों ने अचानक अंधाधुंध फायरिंग कर दी, जिस से उधर से गुजरने वाले एक राहगीर को भी कुछ छर्रे लगे.

इतना ही नहीं उस के बाद उक्त तीनों युवकों ने शहर कोतवाली के पास जा कर भी फायरिंग की थी. उन 3 लड़कों में एक दिलीप ठाकुर भी था. पुलिस ने तीनों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था.

चंद्रपाल दिलीप को जानते थे. उस की जांबाजी देख कर वह काफी प्रभावित हुए. पता लगा कर पुलिस फायरिंग करने वाले लड़कों को तलाशने लगी. उन के घरों पर भी दबिश डाली गईं. लेकिन वे अपने घरों से फरार हो चुके थे.

आस्तीन में पाला सांप

दिलीप के घर वालों ने चंद्रपाल से संपर्क किया. उन्होंने उस से दिलीप को बचाने की गुहार लगाई. चंद्रपाल ने अपने प्रभाव से दिलीप की मदद की. उन्होंने दिलीप को जेल जाने से भी बचा लिया. चंद्रपाल को दिलीप ठाकुर बड़ा ही दिलेर लगा था. उन्होंने सोचा कि यह उन के धंधे के लिए उपयुक्त रहेगा, इसलिए वह तभी से उस की आर्थिक मदद भी करने लगे.

एहसान में दबे दिलीप ठाकुर को चंद्रपाल ने अपने साथ मिला लिया. वह बतौर बौडीगार्ड चंद्रपाल माली के साथ रहने लगा. अच्छे वेतन के अलावा वह उसे प्लौट बिकवाने का कमीशन भी देते थे. चूंकि वह हर समय उन्हीं के साथ रहता था, इसलिए उस के खानेपीने का खर्चा भी वही उठाते थे. वह दिलीप ठाकुर को एक तरह से अपने छोटे भाई की तरह मानते थे.

जब से दिलीप ठाकुर ने चंद्रपाल के साथ रहना शुरू किया था, तब से चंद्रपाल के रुआब में इजाफा भी हो गया था. साथ ही उन का बिजनैस भी बढ़ गया था. घटना से पहले चंद्रपाल ने 2 प्लौट अच्छे दामों में बेचे थे, जिस से उन्हें लाखों का फायदा हुआ था. दोनों प्लौट दिलीप ठाकुर ने बिकवाए थे, जिस से उसे भी कमीशन के कई हजार रुपए मिले थे.

इस कमाई से अभियुक्त दिलीप ठाकुर ने एक मोटरसाइकिल खरीदी, अपने लिए ब्रांडेड कपड़े, जूते खरीदे. अब वह और ज्यादा बनठन कर रहने लगा.

चंद्रपाल शाम को जब अपने धंधे से फारिग हो जाते, वह दिलीप के साथ पीनेपिलाने का दौर शुरू कर देते, जो काफी देर तक चलता था.

18 साल का दिलीप ठाकुर बन ठन कर रहता था. एक दिन चंद्रपाल ने अपनी पत्नी को दिलीप की बहादुरी के किस्से सुनाए तो वह दिलीप से बहुत प्रभावित हुई. दिलीप सोनी को भाभी कहता था. कुछ दिनों बाद ही दिलीप ने महसूस किया कि सोनी का झुकाव उस की तरफ बढ़ रहा है.

दिलीप जानता था कि उस के और सोनी के स्तर में जमीन आसमान का अंतर है, इसलिए वह सब कुछ समझने के बाद भी कदम आगे बढ़ाने से डर रहा था. दिलीप के चुप रहने के बाद सोनी ने ही पहल करते हुए दिलीप के साथ हंसीमजाक और शारीरिक छेड़छाड शुरू कर दी. 18 साल के दिलीप ने भी इस खुले औफर का लाभ उठाते हुए आगे कदम बढ़ा दिए. इस का नतीजा यह हुआ कि जल्द ही दोनों के बीच शारीरिक संबंध बन गए.

सोनी दिलीप से उम्र में करीब 16 साल बड़ी थी लिहाजा उस से संबंध बना कर वह बहुत खुश थी. चंद्रपाल को पत्नी की इस करतूत की भनक तक नहीं लगी.

उधर सोनी ने दिलीप ठाकुर को पूरी तरह अपने प्रेमजाल में फांस लिया था. इस के बाद उसे अपने पति से नफरत सी हो गई. बातबात पर पति से झगड़ना आम सी बात हो गई थी.

चंद्रपाल यह बात भी नहीं समझ पा रहे थे कि पहले हर समय उन के साथ रहने वाला दिलीप अब कोई न कोई बहाना बना कर 2-3 घंटे के लिए अपने घर क्यों चला जाता है. वह दिलीप पर नजर रखने लगे.

बहरहाल, इस तरह के संबंध छिपाए नहीं छिपते हैं. आखिर चंद्रपाल माली को एक दिन यह पता चल ही गया कि दिलीप ठाकुर अपने घर ना जा कर उस की पत्नी सोनी से मिलने जाता है.

चंद्रपाल को जब यह बात पता चली तो लगा जरूर दाल में कुछ काला है. उन्होंने पत्नी से पूछा कि दिलीप तुम्हारे पास क्यों आता है. सोनी ने पति से बड़ी ही सफाई से झूठ बोलते हुए कहा कि आप नाहक मेरे ऊपर शक कर रहे हैं, घर का कुछ सामान वगैरह उस से मंगा लेती हूं.

पत्नी की सफाई के बाद भी चंद्रपाल का शक दूर नहीं हुआ. चंद्रपाल ने दिलीप से साफ कह दिया कि मेरे पीछे तुम मेरे घर नहीं जाओगे. अगर गए तो समझ लेना अंजाम बुरा होगा.

अपने घर की गतिविधि पर नजर रखने के लिए चंद्रपाल ने घर में और घर के बाहर सीसीटीवी कैमरे भी लगवा दिए. लेकिन सोनी उन कैमरों के तार काट देती थी. पति के पूछने पर वह कह देती थी कि तार बंदरों ने तोड़ दिए. चंद्रपाल ने दिलीप को जो तमंचा खरीद कर दिया था, वह उस ने वापस मांगा. लेकिन दिलीप ने बहाना बना कर कह दिया कि वह 2-3 दिनों में तमंचा वापस कर देगा.

उधर सोनी दिलीप ठाकुर के प्यार में पूरी तरह डूब चुकी थी. दिलीप भी बहुत शातिर था. उस की निगाह चंद्रपाल की प्रौपर्टी और पैसों पर थी. सोनी दिलीप के साथ अपनी नई जिंदगी बसाना चाहती थी. चंद्रपाल माली ने अपनी पत्नी सोनी और दिलीप के संबंधों के बारे में एक दिन अपने छोटे भाई मनोज माली को बता दिया.

14 सितंबर को चंद्रपाल अपने नौकर उमेश के साथ प्रौपर्टी डीलिंग के काम से सुबह ही साइट पर चला गया था. 3 साढ़े 3 बजे चंद्रपाल ने नौकर उमेश से कहा कि अभी मेरी तबीयत ठीक नहीं है, चलो घर चलते हैं. घर पर कुछ देर आराम कर के वापस आ जाएंगे.

शाम 4 बजे चंद्रपाल माली जब अपने घर हनुमान गढ़ी पहुंचे तो उन्होंने दरवाजा खोलने के लिए घर की घंटी बजाई. कुछ देर बाद सोनी ने दरवाजा खोला. पति को देख कर वह चौंकते हुए बोली कि आज इतनी जल्दी कैसे आ गए.

चंद्रपाल ने जवाब में कहा कि आज तबीयत नासाज है. यह सुन कर सोनी बाथरूम में चली गई. चंद्रपाल अपनी शर्ट उतार कर बैडरूम में जा कर लेट गए. उसी समय उन्होंने स्टोररूम में किसी के अंदर होने की आहट सुनी तो स्टोररूम को खोल कर देखा. अंदर दिलीप ठाकुर था. उसे देख कर उन का खून खौल गया. उन्होंने दिलीप ठाकुर को दबोच लिया. दोनों में गुत्थमगुत्था होने लगी. उसी समय सोनी भी वहां आ गई. सोनी ने प्रेमी का पक्ष लेते हुए पति के दोनों हाथ पकड़ कर दिलीप से कहा, ‘‘दिलीप आज इस का काम तमाम कर दो.’’

तभी दिलीप ठाकुर ने तमंचे से चंद्रपाल के सीने में गोली मार दी. गोली लगते ही चंद्रपाल एक तरफ लुढ़क गए. यह वहीं तमंचा था जो चंद्रपाल ने उसे अपनी सुरक्षा के लिए दिया था. गोली की आवाज सुनते ही नौकर उमेश वहां आ गया. माजरा समझ कर उस ने हिम्मत दिखाई और दिलीप को दबोच लिया. प्रेमी को छुड़ाने के लिए सोनी ने उमेश के कंधे में पूरी ताकत से काट लिया, जिस की वजह से उमेश की पकड़ ढीली पड़ गई और दिलीप ठाकुर भागने में कामयाब हो गया.

पुलिस ने सोनी से पूछताछ के बाद उस के प्रेमी दिलीप ठाकुर को भी गिरफ्तार कर लिया. दोनों को न्यायालय में पेश कर के 23 सितंबर को जेल भेज दिया. पुलिस ने उस के पास से हत्या में प्रयुक्त तमंचा भी बरामद कर लिया.?

   —कथा पुलिस सूत्रों पर आधारित

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