विश्व के कई देशों में गृहयुद्ध छिड़ा हुआ है. भारत गृहयुद्ध की आग में तो नहीं जल रहा लेकिन देश के तकरीबन हर हिस्से में अकसर हिंसा हो जाती है. इस हिंसा के भिन्नभिन्न कारण होते हैं. इन में धर्म, जाति, भेदभाव की भूमिकाएं ज्यादा शामिल रहती हैं. हिंसा के बाद सरकारी रवैया ऐसा उभरता है कि जिस के चलते माहौल में तनाव और भी ज्यादा हो जाता है. देशविदेश के कुछ ऐसे ही हालात पर यहां एक सरसरी नजर डालते हैं. हरियाणा के फरीदाबाद जिले के अटाली गांव में मसजिद निर्माण को ले कर जाटों और मुसलमानों के मध्य हुए झगड़े में कई लोग घायल हो गए. गांव की मसजिद, दुकानों, घरों में तोड़फोड़ की गई. सैकड़ों लोगों को गांव से पलायन करना पड़ा.अटाली की आग ठंडी होने को थी कि पलवल में आगजनी, तोड़फोड़, पत्थरबाजी और हिंसा शुरू हो गई. इसी बीच महाराष्ट्र के नासिक के निकट हरसुल में आदिवासियों और मुसलमानों के बीच हुई लड़ाई में 2 लोग मारे गए और कई जख्मी हुए. 20 दुकानें जला दी गईं और कई घरों को लूट लिया गया.

जमशेदपुर के मानगो क्षेत्र में छेड़छाड़ की एक घटना ने तोड़फोड़, बंद, जुलूस, कर्फ्यू का रूप अख्तियार कर लिया. शहर के लोगों को 2 हफ्ते तक तनाव व दहशत में रहना पड़ा.जूनजुलाई महीनों में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में पिछड़े वर्ग की एक लड़की द्वारा दलित युवक से प्रेमविवाह करने पर गांव में दोनों वर्गों के बीच झगड़ा फैल गया. पिछले साल मुजफ्फरनगर, मेरठ जिलों में जाटों और मुसलमानों के बीच हुए झगड़े में 47 लोग मारे गए थे. 10 हजार लोग गांवघर छोड़ कर अन्यत्र चले गए. हजारों लोगों को महीनों तक शरणार्थी कैंपों में रहना पड़ा. इन इलाकों में महीनों तक सुरक्षा बलों को तैनात रहना पड़ा.देश के 18 राज्यों में नक्सली फैले हुए हैं. आएदिन हिंसक वारदातें हो रही हैं. आरक्षण को ले कर देश के कई हिस्सों में तनाव बरकरार है. गुजरात में पटेल (पाटीदार) पिछड़े वर्ग में शामिल होने के लिए सड़कों पर हैं तो हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश में जाट ओबीसी का दरजा हासिल करने के लिए रेल, सड़क रोकने के लिए आमादा हैं. पहले से जो जातियां ओबीसी में हैं उन जातियों का जाटों और पटेलों से टकराव चल रहा है. राजस्थान में गुर्जर और मीणा जातियों का आरक्षण के लिए टकराव बना हुआ है. यह टकराव पिछले 7 सालों की देन है जब गुर्जरों ने खुद को अनुसूचित जनजाति में शामिल करने की मांग पर आंदोलन शुरू कर दिया था. मीणा जाति वाले नहीं चाहते कि उन के हक का आरक्षण बंटे. अपने ही देश में, अपने ही लोगों से पुलिस व अन्य सुरक्षा बलों को निबटना पड़ता ही है, कई जगहों पर तो सेना को लगाना पड़ा है.

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